गोल्डन पीरियड संविधान मंथन

संपादक:- मीनू साहू
राजनांदगांव:-छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की धरती से उठने वाली यह पहल आजादी के 78 वर्षों बाद एक नई चेतना का संचार कर रही है। यहां के जागरूक नागरिकों के संघर्ष और भागीदारी से एक ऐसा इतिहास लिखा जाएगा, जिसकी गूंज देश की राजधानी दिल्ली तक सुनाई देगी।भारत के इतिहास में कुछ पल ऐसे होते हैं, जो केवल समय नहीं बल्कि विचारों की क्रांति बन जाते हैं। ऐसा ही एक सुनहरा अवसर लेकर आया है “गोल्डन पीरियड – संविधान मंथन”, जो भारत के महान विचारकों डॉ. भीमराव अंबेडकर और महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के पावन अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि संविधान के मूल्यों को समझने और आत्मसात करने का अभियान है।
राज्य स्तरीय निबंध लेखन प्रतियोगिता
“संविधान मंथन” के अंतर्गत राज्य स्तरीय निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय संविधान के प्रति जागरूकता फैलाना और नागरिकों में वैचारिक गहराई विकसित करना है। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेदों—13, 32, 38, 39, 40, 41, 42, 43, 44, 45, 46, 47, 48, 49, 50 और 51—पर अपने विचार प्रस्तुत करने होंगे।
आकर्षक पुरस्कार
इस प्रतियोगिता में विजेताओं को सम्मानित करने के लिए आकर्षक पुरस्कार रखे गए हैं। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले को ₹11,000, द्वितीय स्थान पर ₹5,100 और तृतीय स्थान पर ₹3,100 की राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही सभी प्रतिभागियों को “भारतीय संविधान” की पुस्तक उपहार स्वरूप दी जाएगी, जो ज्ञान का एक अमूल्य स्रोत है।
महत्वपूर्ण तिथियाँ
आवेदन की अंतिम तिथि अब बढ़ाकर 15 अप्रैल 2026 कर दी गई है। निबंध लेखन की तिथि 17 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है, जबकि परिणाम और पुरस्कार वितरण 19 अप्रैल 2026 को होगा।
भागीदारी के नियम
इस प्रतियोगिता की सबसे खास बात इसकी समावेशिता है। 6 वर्ष से लेकर 100 वर्ष तक के सभी भारतीय नागरिक—चाहे वे छात्र हों, युवा, वरिष्ठ नागरिक, नौकरीपेशा या सेवानिवृत्त—इसमें भाग ले सकते हैं। निबंध घर से लिखकर लाना होगा और शब्दों की कोई सीमा नहीं रखी गई है, जिससे प्रतिभागी अपनी क्षमता के अनुसार विचार व्यक्त कर सकें।
संपर्क और पंजीकरण
जो भी नागरिक इस ऐतिहासिक पहल का हिस्सा बनना चाहते हैं, वे दिए गए मोबाइल नंबर 8839300735 और 9406138940 पर संपर्क कर अपना पंजीकरण कर सकते हैं।
यह “संविधान मंथन” केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक आंदोलन है—जो हमें हमारे अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतंत्र की मूल भावना से जोड़ता है। आइए, इस गोल्डन पीरियड का हिस्सा बनें और संविधान की शक्ति को अपने शब्दों में जीवंत करें।



