“बनगांव शाला में शिक्षिका का शिक्षण से अधिक षड्यंत्र!

प्रधानपाठक विष्णु सिंह साहू के खिलाफ चालबाजी, दो जगह उपस्थिति देकर शिक्षक संहिता की धज्जियां”
बालोद:- शिक्षा का पवित्र मंदिर जब निजी स्वार्थ और छल का अखाड़ा बन जाए, तब शिक्षक समुदाय की साख पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में डौंडी विकासखंड के अंतर्गत आने वाली शासकीय प्राथमिक शाला बनगांव इन दिनों ऐसे ही विवाद का केंद्र बनी हुई है। यहां पदस्थ सहायक शिक्षिका रोहिणी साहू पर विद्यालय में अराजकता फैलाने, प्रधानपाठक विष्णु सिंह साहू को बदनाम करने और सेवा नियमों की खुली अवहेलना करने के गंभीर आरोप लगे हैं।प्रधानपाठक विष्णु सिंह साहू, जो शारीरिक अक्षमता के बावजूद वर्षों से पूर्ण निष्ठा और समयपालन के साथ विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, आज झूठी शिकायतों और षड्यंत्रों का शिकार बन गए हैं। बताया जा रहा है कि रोहिणी साहू ने विद्यालय समय में सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी, भिलाई में एम.ए. परीक्षा दी, जबकि उसी अवधि में उन्होंने विद्यालय उपस्थिति पंजी में अपनी उपस्थिति दर्ज की — जो कि शिक्षक आचरण संहिता 1965 की धारा 3(1), 3(2), 3(5), 4(1) तथा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3(1)(ii) व 3(2) का सीधा उल्लंघन है। यह कृत्य कर्तव्यच्युत आचरण और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।सूत्रों के अनुसार, रोहिणी साहू प्रतिदिन शाला आने के बाद लंबा समय भोजन और मोबाइल बातचीत में व्यतीत करती थीं, जबकि अध्यापन कार्य गौण हो गया था। प्रधानपाठक द्वारा आपत्ति जताने पर उन्होंने “महिला होने का लाभ उठाकर धमकी और अपमानजनक व्यवहार” किया। उन्होंने खुले तौर पर कहा — “मैं तुम्हें इस शाला से हटवाकर रहूंगी।”जांच अधिकारी आर.एस. रायपुरिया, प्राचार्य हाई स्कूल भैंसबोड़ की टीम ने विद्यालय पहुंचकर सभी पक्षों से तथ्य जुटाए। परिणाम स्पष्ट रहा — रोहिणी साहू द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे, कल्पित और निराधार सिद्ध हुए। इसके बावजूद, नए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के पदभार ग्रहण के बाद, शिक्षिका ने पालक शिक्षा समिति के कुछ सदस्यों को बहकाकर विद्यालय में तालाबंदी करवा दी और प्रधानपाठक को दबाव डाल कर हटवाने में सफलता पा ली।स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि “ऐसे कृत्य न केवल शिक्षा प्रणाली का अपमान हैं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है।” शिक्षित वर्ग ने मांग की है कि रोहिणी साहू के खिलाफ त्वरित विभागीय जांच कर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई शिक्षक अपने पद की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने का दुस्साहस न कर सके।अब पूरा जिला शिक्षा विभाग यह देखने को उत्सुक है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है — क्या शिक्षा की मर्यादा बचेगी या व्यक्तिगत स्वार्थों का यह षड्यंत्र आगे भी चलता रहेगा?



