अक्षय आस्था का महापर्व भगवान आदिनाथ के पारणा दिवस पर उमड़ा श्रद्धा का सागर

संपादक :- मीनू साहू
बालोद: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आज आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। यह वही पावन दिवस है, जब अनंत तप, त्याग और साधना के प्रतीक भगवान आदिनाथ ऋषभदेव जी ने एक वर्ष की कठोर तपस्या के पश्चात राजा श्रेयांस के हाथों इक्षु रस (गन्ने का रस) ग्रहण कर अपना प्रथम पारणा किया था। यह घटना केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए गहन प्रेरणा का स्रोत है।
जैन धर्म के इतिहास में यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह हमें संयम, धैर्य और अडिग संकल्प की शक्ति का बोध कराता है। भगवान आदिनाथ ने एक वर्ष तक बिना आहार के तप कर यह संदेश दिया कि आत्मबल और अनुशासन से हर कठिन परीक्षा को पार किया जा सकता है। उनका यह तप मानवता के लिए एक आदर्श बन गया, जो आज भी लाखों लोगों को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
पंकज जैन ने बताया कि बालोद जिले में इस अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पूजा-अर्चना, अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। भक्तों ने प्रभु के चरणों में शीश नवाकर आत्मशुद्धि, शांति और समृद्धि की कामना की। वातावरण भक्ति रस से सराबोर रहा और हर ओर “जय जिनेंद्र” के स्वर गूंजते रहे।
यह पावन पर्व हमें यह भी सिखाता है कि जीवन में केवल भौतिक सुख ही नहीं, बल्कि आत्मिक शांति भी आवश्यक है। दान-पुण्य, करुणा और परोपकार जैसे गुण ही जीवन को सार्थक बनाते हैं। इस दिन लोग जरूरतमंदों की सहायता कर, सेवा भाव अपनाकर और अपने भीतर के अहंकार को त्यागकर सच्चे धर्म का पालन करते हैं।
आइए, इस दिव्य अवसर पर हम भी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लें। बुराइयों से दूर रहकर सत्य, अहिंसा और प्रेम के मार्ग पर चलें, ताकि हमारा जीवन भी पुण्य और प्रकाश से भर सके।
भगवान आदिनाथ की असीम कृपा से सभी के जीवन में अक्षय सौभाग्य, सुख, शांति और आनंद का वास हो।



