हमर छत्तीसगढ़

खाद के नाम पर खुली लूट—सरकारी नियमों की धज्जियां, बालोद में किसानों का शोषण जारी

 

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में किसान एक बार फिर व्यवस्था की मार झेलने को मजबूर है। धान खरीदी की अव्यवस्था से परेशान किसान अब खेती के लिए जरूरी खाद लेने पहुंच रहा है, तो वहां उसे नियमों के खिलाफ लूटा जा रहा है। यह स्थिति न केवल अमानवीय है, बल्कि सीधे-सीधे सरकारी नियमों और व्यापार कानूनों का खुला उल्लंघन भी है।

सरकार द्वारा कहीं भी ऐसा कोई नियम नहीं बनाया गया है कि किसान को खाद के साथ जबरन कीटनाशक, दवा या अन्य सामग्री खरीदने के लिए मजबूर किया जाए। उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertilizer Control Order – FCO) के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि खाद की बिक्री निर्धारित मूल्य पर, बिना किसी शर्त और बिना किसी अन्य उत्पाद को जोड़कर की जाएगी। इसके बावजूद बालोद जिले के कई कृषि केंद्रों में एक बोरी यूरिया (जिसकी कीमत लगभग 350 रुपये है) के साथ 1000 रुपये की कीटनाशक दवा जबरन थमाई जा रही है। यह न केवल FCO का उल्लंघन है, बल्कि अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में भी आता है।

किसान जब सवाल करता है तो उसे “कंपनी का निर्देश” बताकर चुप करा दिया जाता है। सवाल यह है कि जब सरकार और कानून कुछ और कहते हैं, तो कंपनी का निर्देश किस आधार पर किसान पर थोपा जा रहा है? यह साफ संकेत है कि नियमों को ताक पर रखकर संगठित लूट की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार मधु चौक स्थित कृषि केंद्र सहित पूरे बालोद जिला में यही तरीका अपनाया जा रहा है। यह कोई इक्का-दुक्का मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित खेल है, जिसने जिले को भ्रष्टाचार के नक्शे पर शर्मनाक स्थिति में ला खड़ा किया है। किसान मजबूरी में खेती करता है, कर्ज उठाता है और इसी मजबूरी का फायदा उठाकर व्यापारी और दलाल मालामाल हो रहे हैं।यहां सबसे बड़ी जिम्मेदारी कृषि विभाग की बनती है। विभाग का दायित्व है कि वह खाद की उपलब्धता, मूल्य और बिक्री प्रक्रिया पर सख्त निगरानी रखे। लेकिन बालोद में विभाग की चुप्पी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या यह लापरवाही है या फिर मिलीभगत? नियमों के बावजूद कार्रवाई न होना किसानों के अधिकारों का सीधा हनन है।

विष्णु देव साय सरकार किसान हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन बालोद की जमीनी हकीकत इन दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। अगर सरकार सच में किसानों के साथ है, तो नियमों के उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

अब समय चेतावनी का नहीं, सख्त कदमों का है। दोषी कृषि केंद्रों के लाइसेंस रद्द हों, अवैध वसूली की राशि किसानों को लौटाई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो। किसान प्रदेश की रीढ़ है—उसके साथ अन्याय अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

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