बालोद राज्योत्सव में कलेक्टर की लापरवाही या जानबूझा बहिष्कार? भाजपा शहर मंडल पदाधिकारियों को बुलाना तक भूल गया प्रशासन!

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में इस वर्ष का राज्योत्सव कार्यक्रम अपने शाही इंतज़ाम और सांस्कृतिक विविधता से तो चर्चाओं में नहीं है, लेकिन उससे कहीं अधिक प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक उपेक्षा के कारण सुर्खियों में आ गया है।जिला मुख्यालय बालोद में आयोजित इस राज्योत्सव के भव्य उद्घाटन समारोह में भाजपा विधायक एवं अनुसूचित जाति प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डोमन लाल कोसेवाड़ा की स्वर्णिम उपस्थिति रही। कार्यक्रम में जिले भर से अधिकारी, जनप्रतिनिधि और नागरिक जुटे थे।परंतु इस गौरवशाली और ऐतिहासिक अवसर पर जिस बात ने सबको हैरान कर दिया, वह थी — भाजपा शहर मंडल के पदाधिकारियों को पूरी तरह कार्यक्रम से दूर रखा जाना।विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, न तो प्रशासन द्वारा शहर मंडल के पदाधिकारियों को औपचारिक निमंत्रण कार्ड भेजा गया, और न ही किसी प्रकार की टेलीफोनिक सूचना या आमंत्रण कॉल की गई।इस उपेक्षा ने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं — क्या यह प्रशासन की सीधी लापरवाही थी, या फिर किसी सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया राजनीतिक बहिष्कार?कार्यक्रम में जब जिले के अन्य संगठनों और पदाधिकारियों को मंच पर सम्मानपूर्वक बुलाया गया, तब भाजपा शहर मंडल के सदस्य बाहर से दर्शक बनकर देखने को मजबूर रहे।इस घटना ने पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। उनका कहना है कि “राज्योत्सव जैसे गौरवशाली पर्व में जिला प्रशासन ने राजनीति की गंध घोल दी।”स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की इस चूक पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिला कलेक्टर को यह ध्यान रखना चाहिए था कि राज्योत्सव राजनीतिक दलों की सीमाओं से ऊपर उठकर पूरे राज्य का उत्सव है।लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि जिला प्रशासन और नगर पालिका ने इस जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं लिया।यह घटना अब चर्चा का केंद्र बन चुकी है — “कलेक्टर कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उंगली उठना स्वाभाविक है,” क्योंकि ऐसे आयोजन प्रशासनिक साख और निष्पक्षता का आईना होते हैं।लोगों का कहना है कि जब विधायक स्वयं उपस्थित थे, तो उनके संगठन से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों को नजरअंदाज करना कहीं न कहीं प्रोटोकॉल और मर्यादा दोनों का उल्लंघन है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आने वाले समय में जिला प्रशासन और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर गहरा असर डाल सकती है।राज्योत्सव का मंच जहां एकता, संस्कृति और समरसता का प्रतीक होना चाहिए था, वहीं इस बार यह प्रशासनिक असमानता और राजनीतिक उदासीनता का प्रतीक बन गया।अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या जिला प्रशासन इस चूक पर संज्ञान लेकर स्पष्टीकरण देगा, या फिर यह मामला भी कुछ दिनों में “साइलेंट फाइल” बनकर दबा दिया जाएगा।लेकिन इतना तय है कि बालोद में इस बार राज्योत्सव के मंच से ज्यादा कलेक्टर कार्यालय की गलती और शहर मंडल की नाराज़गी की गूंज सुनाई दी।



