हमर छत्तीसगढ़

भर्ती घोटाले पर हिंद सेना का तंज, “भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही नहीं तो हम अपना सर मुंडवाएँगे”

बालोद।  छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग जिला बालोद की संविदा भर्ती अब मजाक बन चुकी है। पारदर्शिता के नाम पर विभाग इतना पारदर्शी है कि कुछ भी दिखाई नहीं देता! शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय अफसर और सरकार मानो आंखों पर पट्टी बांधकर बैठे हैं। भ्रष्टाचारियों को पकड़ने की बजाय उन्हें मानो “संरक्षण” और “सम्मान” दिया जा रहा है। यह स्थिति केवल विभाग की छवि को धूमिल नहीं कर रही बल्कि युवाओं के भविष्य पर भी सीधा प्रहार कर रही है।

सरकार के दावे बड़े-बड़े हैं — “भ्रष्टाचार खत्म करेंगे” — पर हकीकत यह है कि भ्रष्टाचारियों पर गाज गिराना उनके बस का नहीं। अधिकारियों की चुप्पी और नेताओं की खामोशी इस पूरे खेल का सबसे बड़ा सबूत है। भर्ती प्रक्रिया दरअसल युवाओं के लिए नहीं, बल्कि रसूखदारों के चहेतों के लिए रची गई स्क्रिप्ट है। यही कारण है कि बेरोजगार युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। पारदर्शिता के नाम पर खेल इतने गहरे हैं कि आम जनता तो दूर, न्याय मांगने वाले भी हताश और निराश नजर आते हैं।

अब हिंद सेना ने घोषणा की है कि 07 अक्टूबर 2025 को कलेक्टोरेट के सामने प्रतिकात्मक प्रदर्शन होगा। और यह प्रदर्शन केवल नारे और बैनर तक सीमित नहीं रहेगा — संगठन के सदस्य प्रतीकात्मक रूप से सर मुंडवाकर यह संदेश देंगे कि जब तक भ्रष्टाचारियों का सर नहीं झुकेगा, तब तक हम अपना सर झुकाकर इस अन्याय का विरोध करेंगे। इस कदम को केवल विरोध का एक तरीका नहीं, बल्कि व्यवस्था पर व्यंग्यात्मक चोट माना जा रहा है।

यह व्यंग्यात्मक प्रहार सीधा सत्ता पर है — जब भ्रष्टाचारियों को पकड़ने का साहस सरकार और अफसर नहीं दिखा पा रहे, तो जनता अपने सर के बाल उतारकर यह दिखाएगी कि अब धैर्य की आखिरी सीमा भी टूट चुकी है। यह प्रतीकात्मक आंदोलन केवल बालोद जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी गूंज प्रदेशभर में सुनाई देगी। यह संदेश साफ है कि जब तक दोषियों को बचाया जाएगा, तब तक जनता चैन से नहीं बैठेगी।

हिंद सेना ने साफ चेतावनी दी है — या तो दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलकर सत्ताधारियों के लिए बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा करेगा। संगठन का कहना है कि जनता अब और चुप नहीं बैठेगी। यदि आज भर्ती घोटाले जैसे गंभीर मामलों को दबा दिया गया, तो कल यह परंपरा और गहरी जड़ें जमा लेगी। यही कारण है कि हिंद सेना का यह निर्णय केवल एक संगठन का विरोध नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की लड़ाई भी है।

युवाओं का कहना है कि पढ़ाई-लिखाई, मेहनत और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी सब व्यर्थ हो जाती है, जब अंतिम चयन रसूख और पैसों के बल पर होता है। ऐसे में हिंद सेना का यह आंदोलन युवाओं की आवाज को और मजबूत करता है। यह केवल घोटाले के खिलाफ विद्रोह नहीं, बल्कि व्यवस्था को आईना दिखाने का भी प्रयास है।

अंततः सवाल यही उठता है कि क्या सरकार और प्रशासन इस आवाज को सुनेंगे? या फिर चुप्पी साधकर एक और भ्रष्टाचार की कहानी को दबाने की कोशिश करेंगे? 07 अक्टूबर को होने वाला यह आंदोलन इन सवालों का जवाब तय करेगा।

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