हमर छत्तीसगढ़

कोड़ेवा के व्यापारियों पर आरोप, खाद्य विभाग की चुप्पी और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

सरकारी मुफ्त चावल की कथित खरीदारी का नेटवर्क?

संपादक मीनू साहू 

बालोद/सिकोसा:- गरीब परिवारों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से मुफ्त चावल उपलब्ध कराती है, लेकिन बालोद जिले के सिकोसा क्षेत्र में इस व्यवस्था की निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि कोड़ेवा गांव के कुछ व्यापारी ग्रामीण इलाकों में पहुंचकर हितग्राहियों से चावल खरीद रहे हैं। इसके लिए पिकअप सहित अन्य वाहनों का उपयोग किए जाने की बात भी सामने आई है। यदि इस खरीदारी में सरकारी राशन शामिल होने की पुष्टि होती है, तो मामला गरीबों के हक से जुड़े खाद्यान्न के संभावित दुरुपयोग का बन सकता है।

गांव-गांव पहुंचकर चावल खरीदने के आरोप, आखिर किसकी है जिम्मेदारी?

मिली जानकारी के अनुसार, कोड़ेवा गांव के तीन व्यापारियों द्वारा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में घूम-घूमकर चावल खरीदे जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि खरीदा जा रहा चावल वास्तव में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिला सरकारी राशन तो है। लेकिन बाजार में  बेचा किसने है इनकी पुष्टि के लिए खोजने की जरूरत है प्रशासन को मौके पर जांच, खरीद-बिक्री के विवरण और परिवहन संबंधी तथ्यों का सत्यापन आवश्यक है।यदि ग्रामीणों से सरकारी राशन खरीदकर उसे व्यावसायिक लाभ के लिए आगे बेचा जा रहा है, तो यह गंभीर जांच का विषय होगा। सवाल यह भी है कि ऐसी गतिविधियां यदि नियमित रूप से हो रही हैं, तो खाद्य विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

गरीबों के हिस्से का चावल बाजार तक पहुंचा तो जवाबदेही कौन लेगा?

मुफ्त राशन का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सुरक्षा देना है। इस व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका सामने आने पर प्रशासन को तत्काल तथ्यों की जांच करनी चाहिए। संबंधित उचित मूल्य दुकानों के वितरण रिकॉर्ड, व्यापारियों द्वारा खरीदे जा रहे चावल की मात्रा, उसके स्रोत और वाहनों से होने वाले परिवहन की पड़ताल से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।प्रशासन के सामने चुनौती केवल व्यापारियों की गतिविधियों की जांच करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि सरकारी योजना का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचे। यदि किसी स्तर पर नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

कानूनी प्रावधानों के तहत हो सकती है कार्रवाई

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित लागू नियमों और आदेशों के तहत खाद्यान्न के वितरण एवं उपयोग की व्यवस्था निर्धारित है। जांच में सरकारी राशन की नियमविरुद्ध खरीद-बिक्री, अवैध भंडारण या अन्य उल्लंघन प्रमाणित होने पर मामले के तथ्यों के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

खाद्य विभाग से जवाब मांगते सवाल

क्या विभाग को इस कथित खरीदारी की जानकारी है? क्या कोड़ेवा और आसपास के गांवों में जांच कराई जाएगी? क्या चावल के स्रोत और परिवहन की पड़ताल होगी? इन सवालों पर प्रशासन की स्पष्ट प्रतिक्रिया जरूरी है।गरीबों के नाम पर मिलने वाले राशन के संभावित दुरुपयोग की आशंका को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अब निगाहें खाद्य विभाग की कार्रवाई पर हैं। निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि अनियमितता हुई है, तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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