हमर छत्तीसगढ़

अवकाश के दिन वेतन काटने का ‘तानाशाही प्रयोग’—डौंडीलोहारा आईटीआई में प्राचार्य के खिलाफ बगावत तेज!

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में डौंडीलोहारा स्थित राजकीय आईटीआई में चौथे शनिवार वेतन कटौती का मामला तेजी से गंभीर होता जा रहा है। कर्मचारियों और संघों के अनुसार, प्राचार्य ने 22 नवंबर 2025, जो शासन द्वारा घोषित पूर्ण अवकाश था, उस दिन अनुपस्थित दिखाते हुए कर्मचारियों का वेतन काट दिया। यह कार्रवाई पूरे प्रदेश में तकनीकी शिक्षा विभाग के इतिहास में बेहद असाधारण मानी जा रही है, क्योंकि सभी आईटीआई में शनिवार अवकाश वर्षों से सुचारू रूप से लागू है।सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना क्रमांक F 1-3/2012/1/5 ने स्पष्ट कर दिया था कि शनिवार के दिन शासकीय कार्यालय बंद रहेंगे। ऐसे में डौंडीलोहारा आईटीआई का यह कदम किस नियमावली पर आधारित था, यह कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा प्रश्न है। कर्मचारियों ने प्राचार्य से इस संबंध में लिखित आदेश दिखाने की मांग की, परंतु कथित रूप से प्राचार्य कोई स्पष्ट अधिसूचना प्रस्तुत नहीं कर सके।कर्मचारियों का आरोप है कि प्राचार्य लंबे समय से अपनी पदस्थापना का दुरुपयोग करते रहे हैं। उनके खिलाफ पहले भी कर्मचारियों को अपमानित करने, धमकाने, नियमों का पालन न करने, प्रशिक्षणार्थियों की उपेक्षा करने और संस्थान को व्यक्तिगत साम्राज्य की तरह चलाने की शिकायतें उठ चुकी हैं। आरोप यह भी है कि प्राचार्य अपनी मनमर्जी से आदेश जारी करते हैं और जो कर्मचारी आवाज उठाते हैं, उन्हें प्रताड़ना का भय दिखाया जाता है।चौथे शनिवार की वेतन कटौती ने कर्मचारियों में आक्रोश की ज्वाला को और भड़का दिया है। उनका कहना है कि शासन की अधिसूचना के विरुद्ध आदेश जारी करना एक अधिकारी का अधिकार क्षेत्र ही नहीं है। कर्मचारियों ने पूछा—क्या प्राचार्य स्वयं पूरा विभाग चलाते हैं? क्या वे शासन के ऊपर हैं? क्या वे नियमों को ताक पर रखकर अपने निजी निर्णय लागू करने का अधिकार रखते हैं?कर्मचारियों का यह भी कहना है कि पूरे प्रदेश के किसी भी आईटीआई में शनिवार को उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। हजारों कर्मचारी शनिवार को अपने परिवार के साथ समय बिताते हैं, आराम करते हैं या निजी काम निपटाते हैं, जो एक कर्मचारी का अधिकार है। ऐसे में डौंडीलोहारा आईटीआई में शनिवार को ‘कार्यदिवस’ घोषित कर वेतन काट देना न केवल असामान्य है बल्कि शासकीय अधिसूचना की सीधी अवमानना मानी जा रही है।संघ ने प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा को दिए ज्ञापन में कहा है कि यह प्राचार्य अब विभाग के अनुशासन और अधिकारिक प्रक्रियाओं की धज्जियाँ उड़ाने पर आमादा दिखाई देते हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो कोई भी कर्मचारी सुरक्षित महसूस नहीं करेगा। संघ ने मांग रखी—
• कटौती तुरंत वापस हो
• प्राचार्य को पद से हटाया जाए
• विभागीय जांच शुरू की जाए
• कर्मचारियों को प्रताड़ित करने की घटनाओं की भी जांच शामिल हो
• भविष्य में किसी भी अधिकारी को अपनी मनमानी करने से रोकने के लिए कठोर दिशा-निर्देश तय किए जाएँ।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि चेतावनी के बावजूद शासन निष्क्रिय बैठा रहा, तो इसका परिणाम प्रदेश भर में बड़े आंदोलन के रूप में सामने आएगा। संघ का कहना है—अगर कर्मचारियों के अधिकारों पर हथौड़ा चलाया गया, तो जवाब पत्थर से दिया जाएगा।
संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल वार्ता नही, बल्कि निर्णायक संघर्ष होगा।

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