हमर छत्तीसगढ़

पेड़ों के नाम पर राजनीति या पर्यावरण संरक्षण? धर्मेंद्र निषाद का तीखा व्यंग्य

संपादक :- मीनू साहू 

बालोद:- छत्तीसगढ़ में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बालोद जिला में नगर पंचायत डौंडीलोहारा निवासी पर्यावरण प्रेमी धर्मेंद्र निषाद ने पर्यावरण संरक्षण की मौजूदा स्थिति पर व्यंग्यात्मक अंदाज में अपनी बात रखते हुए एक ऐसा संदेश दिया, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि आजकल पौधारोपण से अधिक उसका प्रचार महत्वपूर्ण हो गया है और पेड़ लगाने से पहले यह तय किया जाता है कि वह किसके नाम पर लगाया जाएगा।धर्मेंद्र निषाद ने व्यंग्य करते हुए कहा, “एक पेड़ मां के नाम, दो पेड़ पिता के नाम, तीन पेड़ परिवार के नाम, चार पेड़ पुरखों के नाम, पांच पेड़ राजस्व विभाग के नाम, छह पेड़ प्रशासन के नाम, सात पेड़ मंत्री के नाम, आठ पेड़ वन विभाग के नाम, नौ पेड़ केंद्र सरकार के नाम और दस पेड़ राज्य सरकार के नाम लगादीजिए। बस इतना कर लीजिए, फिर चाहे उन पौधों को पानी मिले या नहीं, उनकी सुरक्षा हो या नहीं, कोई पूछने वाला नहीं होगा।”उन्होंने कहा कि आज पर्यावरण कार्यक्रमों में बड़े लोग आते हैं फोटो खिंचवाते है सोशल मीडिया में डालते है और चले जाते हैं। बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लाखों पौधे लगाने की घोषणाएं होती हैं, लेकिन कुछ महीनों बाद वही पौधे सूख जाते हैं और उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं मिलता।व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा कि यदि पेड़ों को भी सम्मान पत्र, स्मृति चिन्ह और राजनीतिक पहचान मिलने लगे तो शायद उनकी किस्मत बदल जाए। वर्तमान समय में पौधे कम और उनके नाम पर होने वाली घोषणाएं अधिक दिखाई देती हैं। पर्यावरण की रक्षा केवल भाषणों, नारों और सरकारी आंकड़ों से नहीं होगी, बल्कि लगाए गए प्रत्येक पौधे को जीवित रखने की जिम्मेदारी निभानी होगी।धर्मेंद्र निषाद ने कहा कि पर्यावरण दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति आजीवन दायित्व का स्मरण है। यदि वास्तव में धरती को हरा-भरा बनाना है तो पेड़ों के नाम बांटने की बजाय उनकी देखभाल की संस्कृति विकसित करनी होगी। क्योंकि पेड़ यह नहीं देखते कि उन्हें किसके नाम पर लगाया गया है, वे केवल पानी, सुरक्षा और संवेदनशीलता चाहते हैं।उनका यह व्यंग्य वर्तमान व्यवस्था और समाज दोनों पर एक सवाल खड़ा करता है कि आखिर हमें पेड़ों की चिंता अधिक है या पेड़ों के नाम पर मिलने वाली वाहवाही की? पर्यावरण बचाने का सबसे बड़ा संकल्प यही है कि पौधे केवल लगाए न जाएं, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित भी किया जाए।

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