बच्चों की सुरक्षा दांव पर, जिम्मेदारों की भूमिका कटघरे में शिक्षा मंदिर के नाम पर कब्जों का खेल!

संपादक :- मीनू साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में डौंडीलोहारा ब्लॉक मुख्यालय के कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय के सामने शासकीय भूमि पर फैले अवैध कब्जों ने पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस स्थान पर विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी जानी चाहिए थी, वहां नियमों की अनदेखी, प्रशासनिक सुस्ती और कथित संरक्षणवाद की तस्वीर सामने आ रही है।शिकायतों और जारी नोटिस से यह स्पष्ट होता है कि विद्यालय के मुख्य द्वार के सामने वर्षों से अवैध दुकानें, ठेले और अस्थायी व्यवसाय संचालित होते रहे। हैरानी की बात यह है कि यह सब खुलेआम होता रहा, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कठोर कदम उठाने की जरूरत नहीं समझी। जब स्थिति नियंत्रण से बाहर पहुंच गई, तब कार्रवाई की औपचारिकता निभाई जाने लगी।सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि शिकायत में विद्यालय से जुड़े जिम्मेदार व्यक्तियों पर भी संरक्षण देने जैसे आरोप लगाए गए हैं। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है, तो यह केवल कर्तव्यहीनता नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था के साथ किया गया घोर अन्याय माना जाएगा। जिन लोगों पर विद्यार्थियों की सुरक्षा और अनुशासन की जिम्मेदारी है, उन्हीं पर सवाल उठना पूरे तंत्र की विफलता को उजागर करता है।विद्यालय के सामने फैली अव्यवस्था ने छात्र-छात्राओं के लिए जोखिमपूर्ण हालात पैदा किए। सड़क पर अतिक्रमण, भीड़भाड़ और असंगठित गतिविधियों ने शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित किया। यह स्थिति किसी एक दिन में नहीं बनी, बल्कि लंबे समय तक चली उदासीनता का परिणाम प्रतीत होती है।अब जनता यह जानना चाहती है कि आखिर किसकी शह पर सरकारी भूमि का दुरुपयोग होता रहा? कौन लोग थे जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर कब्जाधारियों को बढ़ावा दिया? और क्यों संबंधित अधिकारी समय रहते कार्रवाई करने में असफल रहे?केवल नोटिस जारी कर देना पर्याप्त नहीं है। इस पूरे मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके विरुद्ध कठोर प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई होना आवश्यक है। अन्यथा यह संदेश जाएगा कि सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों और उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ व्यवस्था केवल कागजी चेतावनी तक ही सीमित है।



