शक्ति, संस्कार और संगठन का संगम ग्राम गुजरा में अखिल भारतीय हल्बा/हलबी आदिवासी समाज ने मनाया शक्ति दिवस”

रिपोर्टर :- दिनेश कुमार नेताम
बालोद :- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम गुजरा में अखिल भारतीय हल्बा/हलबी आदिवासी समाज द्वारा शक्ति दिवस का भव्य, गरिमामय और प्रेरणादायी आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज की एकता, संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक चेतना को सशक्त रूप से प्रस्तुत करने वाला मंच बनकर उभरा।कार्यक्रम का शुभारंभ माँ शक्ति स्वरूपा दंतेश्वरी माता की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ। श्रद्धा और आस्था से ओतप्रोत समाजजनों ने कलश यात्रा निकालकर ग्राम की गलियों में भ्रमण किया, जिससे पूरे गांव में आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हुआ। इसके पश्चात कार्यक्रम स्थल हल्बा सामाजिक भवन में आयोजन को विस्तार दिया गया, जहां समाज के विभिन्न वर्गों की उल्लेखनीय सहभागिता देखने को मिली।शक्ति दिवस के अवसर पर समाज के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर शिक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश दिया गया। वहीं समाज के बुजुर्गों को शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया, जो यह दर्शाता है कि हल्बा/हलबी समाज अपनी जड़ों, परंपराओं और अनुभवों को सर्वोच्च स्थान देता है। बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समाज की लोकसंस्कृति, परंपरा और कला को जीवंत रूप में मंच पर उतारा, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहना के साथ देखा।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाज के जिला प्रमुख ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि समाज की रीति-परंपरा, संस्कृति और आपसी एकता ही उसकी वास्तविक शक्ति है। उन्होंने समाज को संगठित रहने, अपनी पहचान को सहेजने और भावी पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने पर विशेष बल दिया।ग्राम समाज प्रमुख एवं पूर्व जनपद सदस्य राजेश चुरेंद्र ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज की प्रगति तभी संभव है जब हर व्यक्ति सेवा भाव से जुड़कर सकारात्मक दिशा में कार्य करे। उन्होंने युवाओं से समाज को नई ऊर्जा, नई सोच और विकास की ओर ले जाने का आह्वान किया, ताकि हल्बा/हलबी समाज आत्मनिर्भर और सशक्त बन सके।
पूर्व सरपंच कंष राम ने युवाओं को शिक्षा के महत्व को समझाते हुए कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जिससे समाज सम्मान, अधिकार और उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। उन्होंने आने वाले समय में आदिवासी समाज को जागरूक, एकजुट और अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता पर बल दिया।कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावशाली संचालन शिक्षक केवल राम तारम द्वारा किया गया। बुजुर्ग सम्मान में दसोदा बाई, रजवंती बाई, अहिल्याबाई चुरेंद्र, बलीराम लाटिया, बरातु राम, मदन लाल सिवाना, नवशीला बाई सहित अनेक वरिष्ठजनों को सम्मानित किया गया।इस आयोजन में पूर्व जनपद अध्यक्ष प्रकाश आर्य, सचिव उमेंदी राम, युवा समाज मंडल प्रमुख रोमेश सिवाना, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष श्रीमती पांचो बाई मलेंद्र, उपसरपंच लीगम भुआर्या सहित समाज के अनेक पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और ग्रामवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।शक्ति दिवस का यह आयोजन समाज को उसकी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने, शिक्षा और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने तथा नई पीढ़ी में आत्मगौरव, जिम्मेदारी और सामाजिक सरोकार की भावना विकसित करने का सशक्त प्रयास रहा। यह कार्यक्रम यह संदेश देता है कि संगठित समाज ही सशक्त भविष्य की नींव रख सकता है।



