हमर छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य की गूंज राष्ट्रीय मंच पर दल्ली राजहरा के नन्हे कलाकारों ने रचा स्वर्णिम इतिहास

 

बालोद:- छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाते हुए बालोद जिले के दल्ली राजहरा के नन्हे कलाकारों ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य की जीवंत, सजीव और आत्मा से जुड़ी प्रस्तुति के माध्यम से दल्ली राजहरा के बच्चों ने राष्ट्रीय मंच पर ऐसा परचम लहराया, जिसने पूरे क्षेत्र को गौरव से भर दिया।मध्य भारत के सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल “नाट्य नर्तन 2025” अखिल भारतीय राष्ट्रीय नृत्य, संगीत एवं ललित कला प्रतियोगिता एवं महोत्सव का आयोजन दुर्ग (छत्तीसगढ़) में किया गया। यह भव्य आयोजन छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मान्यता प्राप्त था, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित मध्यप्रदेश, नागपुर, बिलासपुर और अन्य राज्यों से सैकड़ों प्रतिभागियों ने भाग लेकर अपनी कला का प्रदर्शन किया।इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में दल्ली मॉडर्न आर्ट क्लब (D-MAC) के सब-जूनियर वर्ग (8 से 11 वर्ष) के बच्चों ने समूह छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य में प्रथम स्थान प्राप्त कर ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की। मंच पर जब पारंपरिक वेशभूषा, लोकधुनों और भावपूर्ण नृत्य की संगति बनी, तो दर्शक ही नहीं, निर्णायक मंडल भी मंत्रमुग्ध हो उठा।
समूह लोकनृत्य में प्रतिभागी कलाकारों में ईशा मरकाम, फलक यादव, रोशनी गुप्ता, पूर्विका साहू, अनन्य गुप्ता, नायरा नायक एवं वाच्य शामिल रहे। सभी बच्चों ने सामूहिक तालमेल, अनुशासन और लोकभावना की अद्भुत मिसाल पेश की।प्रतियोगिता में व्यक्तिगत श्रेणियों में भी दल्ली राजहरा के कलाकारों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। एकल नृत्य (सब-जूनियर वर्ग) में नायरा नायक ने प्रथम स्थान अर्जित कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वहीं चित्रकला प्रतियोगिता में भी D-MAC से जुड़े बच्चों ने सफलता का परचम लहराया—मान्या (सब-जूनियर वर्ग) ने प्रथम स्थान, स्वर्णिका जायसवाल (जूनियर वर्ग) ने प्रथम स्थान तथा राधा भारद्वाज (सीनियर वर्ग) ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।इस संपूर्ण सांस्कृतिक प्रस्तुति के पीछे कोरियोग्राफर विजय बोरकर एवं मिलन मराई की कड़ी मेहनत, मार्गदर्शन और वर्षों का अनुभव स्पष्ट रूप से झलकता रहा। उत्कृष्ट प्रशिक्षण के लिए दोनों गुरुओं को प्रतियोगिता के दौरान गुरु सम्मान के अंतर्गत सॉल्व सर्टिफिकेट एवं ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया।
नाट्य नर्तन आयोजन के डायरेक्टर चेतन बोरकर ने बताया कि दल्ली राजहरा की छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य प्रस्तुति को जजों एवं दर्शकों से विशेष सराहना मिली और यह प्रस्तुति प्रतियोगिता की यादगार प्रस्तुतियों में शामिल रही।
इस अवसर पर दल्ली मॉडर्न आर्ट क्लब के डायरेक्टर विजय बोरकर ने कहा कि आज के डिजिटल युग में बच्चों पर मोबाइल और टेलीविजन का नकारात्मक प्रभाव बढ़ रहा है। ऐसे समय में कला, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियाँ बच्चों के शारीरिक, मानसिक विकास के साथ-साथ आत्मविश्वास और अनुशासन को मजबूत करती हैं। उन्होंने बताया कि बीते 20 वर्षों से दल्ली मॉडर्न आर्ट क्लब एवं मॉडर्न डांस अकैडमी निरंतर प्रयास कर दल्ली राजहरा और छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला रहे हैं।
कार्यक्रम में मुख्य महाप्रबंधक राजहरा खदान समूह आर.बी. गहरवार ने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए प्लास्टिक पॉलीथिन के कम उपयोग तथा कागज से बने थैलों को अपनाने का आह्वान किया। इस दौरान नितेश छत्री की उपस्थिति ने बच्चों का उत्साह और बढ़ाया।बालोद जिला प्रशासन एवं नगरवासियों के सहयोग से मिली यह सफलता संपूर्ण लौह नगरी दल्ली राजहरा के लिए गर्व, प्रेरणा और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक बन गई है।

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