झूठे आवेदनों की साजिश बेनकाब कलेक्टर–एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग

बालोद :- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में प्रेस रिपोर्टर क्लब के पदाधिकारियों और सदस्यों को बदनाम करने की सुनियोजित कोशिश अब खुलकर सामने आ गई है। मीनू साहू एवं तरुण नाथ योगी द्वारा अखबारों और टीवी में प्रकाशित/प्रसारित खबरों को तोड़-मरोड़कर भ्रामक जानकारी के साथ अटल बिहारी दुबे द्वारा एसपी को दिए आवेदन को क्लब ने दुर्भावनापूर्ण, झूठा और आपत्तिजनक करार देते हुए कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को निष्पक्ष जांच के लिए ज्ञापन सौंपा है। क्लब का आरोप है कि यह पूरा घटनाक्रम पत्रकारिता की आवाज को दबाने और प्रशासन को भ्रमित करने की साजिश का हिस्सा है।
प्रेस रिपोर्टर क्लब, जो एक पंजीकृत संगठन है और वर्षों से संविधान, कानून तथा पत्रकारिता की मर्यादाओं के भीतर रहकर सामाजिक सरोकारों पर काम करता आया है, का कहना है कि अखबार में प्रकाशित खबरों को आधार बनाकर तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा गया। इन्हीं भ्रामक आधारों पर क्लब के जिला अध्यक्ष, प्रदेश संरक्षक और अन्य पदाधिकारियों के विरुद्ध असत्य आरोप गढ़े गए, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस पूरे मामले में खिलावन चंद्राकर का नाम जानबूझकर घसीटा गया, जबकि क्लब के अनुसार उनका इन कथित घटनाओं से कोई लेना-देना नहीं है। क्लब का कहना है कि खिलावन चंद्राकर फास्ट न्यूज चैनल के रिपोर्टर हैं और उनका जनसंपर्क कार्यालय में नियुक्ति से संबंधित पत्र विधिवत जमा है। जिस टीवी न्यूज चैनल का वह रिपोर्टर है उसके टीवी न्यूज चैनल में अटल बिहारी दुबे का कोई भी खबर नहीं दिखाया गया है इसके बावजूद कुछ व्हाट्सएप ग्रुपों में उनके नाम को लेकर भ्रामक और गुमराह करने वाली जानकारी फैलाने का प्रयास किया गया, जो न केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा पर हमला है बल्कि पत्रकारिता की गरिमा पर भी सीधा प्रहार है।क्लब ने प्रशासन से मांग की है कि अटल बिहारी दुबे द्वारा दिए गए आवेदन और जिन खबरों को आधार बनाया गया है, उनकी निष्पक्ष, तथ्यपरक जांच कराई जाए। संबंधित स्थानों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं, सभी पक्षों से पूछताछ हो और तथ्यों की गहराई से पड़ताल की जाए। यदि आरोप झूठे और मनगढ़ंत पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही खिलावन चंद्राकर का नाम जोड़ने के पीछे की मंशा की अलग से जांच की मांग भी की गई है।इस पूरे घटनाक्रम पर प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष ने तीखा बयान देते हुए कहा कि,“यह मामला केवल एक संगठन पर हमला नहीं है, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता को डराने-धमकाने की कोशिश है। झूठे आवेदन, अफवाहें और व्हाट्सएप के जरिए फैलाई जा रही गलत जानकारियां एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं। हम प्रशासन से अपेक्षा करते हैं कि बिना दबाव के सच्चाई सामने लाई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई भी पत्रकारिता की आड़ में या उसके खिलाफ इस तरह की गंदी राजनीति करने की हिम्मत न कर सके।”प्रेस रिपोर्टर क्लब ने यह भी मांग की है कि आगे से इस प्रकार के निराधार आरोपों पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि पत्रकार और संगठन बेवजह की प्रताड़ना से बच सकें। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या सच्चाई सामने आएगी या झूठ का शोर फिर किसी ईमानदार आवाज को दबाने की कोशिश करेगा।



