हमर छत्तीसगढ़

डीएमएफ फंड में खेल या लापरवाही? 10.53 लाख के पेवर ब्लॉक निर्माण पर उठे गंभीर सवाल

रिपोर्ट:- गोवर्धन ताम्रकार 

दुर्ग/अहिवारा:- छत्तीसगढ़ में दुर्ग जिला के अहिवारा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने डीएमएफ निधि से कराए जा रहे पेवर ब्लॉक निर्माण कार्य ने अब विवाद का रूप ले लिया है। लगभग 10 लाख 53 हजार रुपये की स्वीकृत राशि वाले इस निर्माण पर भारी अनियमितताओं, घटिया गुणवत्ता और संभावित भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर कार्यालय में पहुंचने के बाद अब यह मुद्दा स्थानीय जनचर्चा का केंद्र बन चुका है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मौके पर दिखाई दे रहा निर्माण कार्य स्वीकृत राशि के अनुरूप नहीं है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस काम के लिए 10 लाख से अधिक खर्च दिखाया जा रहा है, जमीन पर उसका आधा भी काम नजर नहीं आता। लोगों का आरोप है कि भुगतान पूर्ण दिखाने की तैयारी हो सकती है, जबकि गुणवत्ता और मात्रा दोनों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हैं।
शिकायत के बाद बढ़ी हलचल, निरीक्षण भी हुआ
सूत्रों के अनुसार शिकायत दर्ज होने के बाद छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज लिमिटेड के अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के तुरंत बाद निर्माण कार्य से जुड़ा सूचना बोर्ड हटाए जाने की खबर ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया।स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि निर्माण कार्य स्वीकृत राशि और मानकों के अनुसार हुआ है, तो सूचना बोर्ड हटाने की जरूरत क्यों पड़ी? लोगों में चर्चा है कि कहीं जांच से पहले तथ्यों को छिपाने या जिम्मेदारी से बचने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा।जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे अधिकारी इस पूरे मामले में जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. रवींद्र वर्मा से बात की गई, तो उन्होंने साफ कहा कि यह कार्य “ऊपर से कराया गया है” और उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है। प्रभारी के इस बयान ने भी कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं—यदि अस्पताल परिसर में काम हुआ, तो स्थानीय प्रशासनिक निगरानी क्यों नहीं रही?जनता में बढ़ा आक्रोश, जांच की मांग तेजअहिवारा के नागरिकों का कहना है कि डीएमएफ निधि जनता के हित और बुनियादी सुविधाओं के लिए होती है। यदि इसी में गड़बड़ी होगी तो ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का भरोसा कैसे कायम रहेगा। लोगों ने निष्पक्ष तकनीकी जांच, माप पुस्तिका की जांच, भुगतान विवरण सार्वजनिक करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और दुर्ग कलेक्टर कार्यालय की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच निष्पक्ष हुई, तो यह मामला सिर्फ एक निर्माण विवाद नहीं बल्कि डीएमएफ फंड के उपयोग की पारदर्शिता की बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।

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