व्यवस्था पर प्रहार करती डॉ. अशोक आकाश की कलम जन चेतना का स्वर

बालोद:- धरती से उठी सजग और प्रतिबद्ध लेखनी के धनी डॉ. अशोक आकाश, ग्राम कोहंगाटोला, जिला बालोद, राज्य छत्तीसगढ़ के ऐसे रचनाकार हैं जिनकी कविता केवल शब्द नहीं, बल्कि समाज की धड़कनों का दस्तावेज है। उनकी रचनाएँ अवसरवाद, राजनीतिक पाखंड और जनवंचना पर तीखा प्रहार करती हैं। प्रस्तुत घनाक्षरी में भी उनकी निर्भीक दृष्टि, जनपक्षधरता और सच बोलने का साहस प्रभावशाली रूप में उभरकर सामने आता है।
बार बार का चुनाव, देख बाबा भीमराव,
नेता आप ही का नॉंव, दॉंव में लगाते हैं।
प्रलोभन बिना पूर्ण, होता नहीं है चुनाव,
मदिरा की पेटी गॉंव, गॉंव में लुटाते हैं।।
संविधान ले के हाथ, कसमें तो बड़ी खात,
काम पड़े बात-बात, ताक पे सजाते हैं।
भीड़ में ‘मसीहा’ बन, फोटो खिंचवाते तन,
घर जा के वही रंग, अपना दिखाते हैं।।
सिद्धांतों की लाश लॉंघ, शर्त कुर्सियों की बॉंध,बंदरों सी डाल-डाल, कूद दल बदले।
बेचकर स्वाभिमान, बने कुछ तो महान्
अवसर पाके ये तो, अपनी आत्मा छले।।
जन-जन को जकड़, सत्ता पाते ही अकड़,
अहंकार रथ चल विरोधी को कुचले।
जनता को भरमाये, गिरगिट शरमाये,
बात-बात गरमाये मेढ़क सा उछले।।देते एक मुट्ठी चने, विडियो हजार बने, बेबस गरीब गिने, जश्न ये मनाते हैं।
एक केला दस थाम, फोटो खिंचे राम-राम!
रोज ये मदद नाम , रोटी सेंक जाते हैं।।
दान का ढिंढोरा पीट, हीरो करे गीज-गीज।
निष्ठा कौड़ी बेच-बेच, दल बदलाते हैं।।
दुखिया के साथ खड़े, हॉंस सेल्फी लेते बड़े,
डींग मार भाषण में, ताली बजवाते हैं।।
डॉ.अशोक आकाश
ग्राम कोहंगाटोला बालोद छत्तीसगढ़.
9755889199



