गांव की चौपाल से मिलेगा राजस्व न्याय अब पंचायत स्तर पर नामांतरण-बंटवारा होगा आसान

रिपोर्टर:- मीनू साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भूमि प्रशासन को गांवों तक सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। संशोधित राजस्व प्रावधानों के तहत अब अविवादित नामांतरण तथा पारिवारिक बंटवारे जैसे मामलों का निराकरण सीधे ग्राम पंचायत स्तर पर किया जाएगा। इस व्यवस्था से ग्रामीणों को तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित होगा।
बालोद जिले में इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए पंचायत सचिवों का चरणबद्ध प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार विकासखंड स्तर पर आयोजित कार्यशालाओं में सचिवों को राजस्व नियमों, डिजिटल पोर्टल संचालन और आवेदन प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है। 18 फरवरी को बालोद विकासखंड तथा 19 फरवरी को गुण्डरदेही क्षेत्र में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए।
कार्यशालाओं में सचिवों को बताया गया कि अविवादित मामलों में पंचायतें विधिसम्मत अधिकार के साथ आदेश जारी कर सकेंगी। इसके लिए भूमि अभिलेख, वारिस प्रमाण, सीमांकन विवरण तथा सहमति दस्तावेज आवश्यक होंगे। डिजिटल रिकॉर्ड को अद्यतन करने हेतु अधिकारियों ने ऑनलाइन राजस्व प्रणाली, नागरिक पंजीयन प्रक्रिया और आवेदन ट्रैकिंग प्रणाली की पूरी जानकारी दी। सचिवों को यह भी समझाया गया कि आदेश जारी होने के बाद अभिलेखों में संशोधन तत्काल दर्ज किया जाए ताकि भविष्य में कोई विवाद उत्पन्न न हो।
इस पहल का सबसे बड़ा लाभ किसानों और ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। अब खेत, मकान या पैतृक संपत्ति के नामांतरण के लिए महीनों प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। परिवार के भीतर सहमति से हुए बंटवारे को पंचायत स्तर पर वैधता मिलने से ऋण लेने, फसल बीमा, सरकारी योजनाओं तथा भूमि बिक्री-खरीद जैसे कार्य सरल होंगे। छोटे किसानों के लिए यह व्यवस्था विशेष रूप से राहतकारी है, क्योंकि दस्तावेज अपडेट न होने से उन्हें अक्सर योजना लाभ से वंचित रहना पड़ता था।
प्रशासन का मानना है कि स्थानीय स्तर पर निर्णय होने से पारदर्शिता बढ़ेगी, खर्च घटेगा और विवादों की संख्या भी कम होगी। सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि पंचायत कार्यालय में सूचना प्रदर्शित करें, ग्रामीणों को आवेदन प्रक्रिया समझाएं और समय सीमा के भीतर प्रकरणों का निपटारा सुनिश्चित करें। साथ ही राजस्व निरीक्षक और पटवारी तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगे ताकि रिकॉर्ड की शुद्धता बनी रहे।
इस व्यवस्था से गांवों में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की मजबूत मिसाल बन रही है। यदि पंचायतें सक्रियता से काम करें तो भूमि संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान संभव है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और किसानों का भरोसा शासन पर और मजबूत होगा।



