हमर छत्तीसगढ़

रसोइयों के मानदेय, सेवा सुरक्षा और कार्यस्थल संरक्षण को लेकर प्रदेशभर में उठी आवाज

संपादक:- मीनू साहू 

बालोद:- छत्तीसगढ़ के स्कूलों में वर्षों से मध्याह्न भोजन व्यवस्था को संचालित करने वाले रसोइयों की समस्याओं को लेकर अब संगठित रूप से आवाज उठने लगी है। विभिन्न संगठनों द्वारा शासन और शिक्षा विभाग के समक्ष ज्ञापन प्रस्तुत कर रसोइयों के मानदेय, सेवा सुरक्षा तथा कार्यस्थल पर स्थायित्व से जुड़े मुद्दों के समाधान की मांग की गई है। हाल ही में भेजे गए पत्रों में 16 जून से 30 जून की अवधि के मानदेय भुगतान सहित कई महत्वपूर्ण विषयों को प्रमुखता से उठाया गया है।प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, रसोइयों का कहना है कि वे लंबे समय से विद्यालयों में मध्याह्न भोजन तैयार करने का कार्य कर रहे हैं और इस व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके बावजूद उन्हें समय-समय पर सेवा संबंधी अनिश्चितताओं, मानदेय भुगतान में देरी तथा कार्य से हटाए जाने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। संगठन ने इन मुद्दों को गंभीर बताते हुए शासन स्तर पर त्वरित हस्तक्षेप की आवश्यकता जताई है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि कई स्थानों पर पुराने आदेशों अथवा स्थानीय स्तर के निर्णयों के आधार पर कार्यरत रसोइयों को हटाने की स्थिति निर्मित हो रही है, जिससे उनमें असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। संगठन का कहना है कि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए किसी भी रसोइये को कार्य से पृथक नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि बच्चों की दर्ज संख्या अथवा अन्य प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर रसोइयों को रोजगार से वंचित न किया जाए।

पत्र में 16 जून से 30 जून तक की अवधि के मानदेय भुगतान को लेकर भी स्पष्ट मांग रखी गई है। संगठन का तर्क है कि इस अवधि में कार्य करने वाले रसोइयों को उनके श्रम के अनुरूप पारिश्रमिक दिया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त वर्तमान व्यवस्था में कार्यरत रसोइयों को अस्थायी स्थिति से निकालकर पूर्णकालिक दर्जा प्रदान करने तथा मानदेय को कलेक्टर दर के अनुरूप निर्धारित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।

संगठन के पदाधिकारियों ने शिक्षा विभाग, लोक शिक्षण संचालनालय तथा राज्य शासन से अनुरोध किया है कि रसोइयों से जुड़े लंबित मामलों का संवेदनशीलता के साथ निराकरण किया जाए। उनका कहना है कि मध्याह्न भोजन योजना बच्चों के पोषण और विद्यालयी उपस्थिति से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है, इसलिए इसे संचालित करने वाले रसोइयों के हितों की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। संगठन ने चेतावनी नहीं बल्कि संवाद और समाधान के माध्यम से सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा व्यक्त करते हुए शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।

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