मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तक मांगें पहुंचाने तथा पांचों विकासखंडों में संगठन मजबूत करने पर बनी सहमति बंजारी धाम में एक जुट हुए कला साधक
वरिष्ठ कलाकारों की पेंशन, जरूरतमंदों को आर्थिक मदद और लोककला के संरक्षण का मुद्दा उठाअधिकार और सम्मान के लिए

संपादक:- मीनू साहू
बालोद (AD न्यूज) :- छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षण देने और लोक कलाकारों के हितों को शासन तक पहुंचाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ लोक कलाकार कल्याण संघ, जिला बालोद की बैठक बालोद-राजनांदगांव मार्ग स्थित बंजारी धाम में आयोजित की गई। बैठक में कलाकारों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति, वरिष्ठ साधकों के सम्मान, पेंशन और जरूरतमंद कलाकारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। साथ ही संगठन के विस्तार और आगामी कार्यकारिणी के गठन की रणनीति भी तैयार की गई।
लोककला के दिग्गजों ने साझा किए विचार
बैठक में पद्मश्री सम्मानित नाचा-गम्मत कलाकार डोमार सिंह कुंवर, छत्तीसगढ़ी गीतकार, गायक एवं संगीतकार विष्णु कोठारी ‘मीत’, थान सिंह मंडावी, तुलसी मालेकर सहित लोककला जगत से जुड़े अनेक साधक उपस्थित रहे। इनकी सहभागिता ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया।लोककला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान, परंपरा और जनजीवन की अभिव्यक्ति है। नाचा-गम्मत, भरथरी गायन, लोकगीत और पारंपरिक संगीत के जरिए कलाकार पीढ़ियों से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं। ऐसे में इन साधकों को उचित सम्मान, प्रोत्साहन और आर्थिक सुरक्षा मिलना आवश्यक बताया गया।
कलाकारों के कल्याण को लेकर उठे अहम सवाल
बैठक में संगीत शिक्षक लीलाधर ढाले, पूर्व में जिला लोक कल्याण कलाकार संघ के अध्यक्ष मनोनीत रहे नरेश रजक तथा द्वारिका कश्यप ने भी सहभागिता की। भरथरी गायिका गुनित साहू, संत राम आसनिक, मोहनी देवांगन, रामनारायण धनकर, विशंभर कोमरे और जितेंद्र कुमेटी सहित अन्य कलाकारों ने संगठन की भावी गतिविधियों पर विचार रखे।चर्चा के दौरान यह विषय प्रमुखता से सामने आया कि जीवनभर लोककला की साधना करने वाले वरिष्ठ कलाकारों को वृद्धावस्था में आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े। पात्र कलाकारों को पेंशन का लाभ मिले तथा जरूरतमंद कलाकारों को कठिन परिस्थितियों में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी पहल होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी कलाकारों की आवाज
कलाकारों के हितों से जुड़ी मांगों को संस्कृति विभाग और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के समक्ष रखने के लिए सामूहिक रूप से पहल करने पर विचार किया गया। उद्देश्य है कि लोक कलाकारों की समस्याओं को शासन के संज्ञान में लाकर उनके समाधान की दिशा में ठोस प्रयास किए जा सकें।
पांचों विकासखंडों में होगा संगठन का विस्तार
बैठक में जिले के पांचों विकासखंडों में ब्लॉक अध्यक्ष नियुक्त करने की तैयारी पर भी चर्चा हुई। संगठन का मानना है कि स्थानीय स्तर पर मजबूत इकाई बनने से कलाकारों की समस्याएं सामने आएंगी और उनकी मांगों को व्यवस्थित ढंग से शासन तक पहुंचाना आसान होगा।बैठक में लोककला के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और संगठनात्मक एकजुटता को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। कलाकारों ने उम्मीद जताई कि सामूहिक प्रयासों से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई मजबूती मिलेगी और लोककला साधकों के हितों की दिशा में सार्थक पहल हो सकेगी।



