हमर छत्तीसगढ़

बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, भूपेन्द्र चन्द्राकर ने तत्काल सर्वे और मुआवजे की उठाई मांग

खेतों में गिरी धान की फसल से किसानों की बढ़ी चिंता, फसल बीमा का लाभ दिलाने, समर्थन मूल्य पर खरीदी और नमी में छूट देने शासन-प्रशासन से आग्रह

संपादक मीनू साहू 

बालोद:- जिला में मौसम की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बेमौसम बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में पकने की कगार पर खड़ी धान की फसल गिर गई है। महीनों की मेहनत, खाद-बीज पर खर्च की गई पूंजी और अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे किसानों के सामने अब आर्थिक संकट गहराने की आशंका है। इस स्थिति को देखते हुए भूपेन्द्र चन्द्राकर, अर्जुन्दा, जिला बालोद ने शासन-प्रशासन से प्रभावित किसानों को तत्काल राहत पहुंचाने की मांग की है।भूपेन्द्र चन्द्राकर ने कहा कि किसान पूरे साल मेहनत करके अपनी फसल तैयार करता है। खेती के लिए खाद, बीज, दवाइयों, मजदूरी और अन्य जरूरी कार्यों में बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। जब फसल तैयार होने का समय आता है, तब बेमौसम बारिश जैसी प्राकृतिक आपदा किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर देती है। ऐसे कठिन समय में किसानों को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए, बल्कि सरकार और प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ उनकी मदद के लिए आगे आना चाहिए।उन्होंने मांग की कि राजस्व एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम बनाकर प्रभावित गांवों और खेतों का तत्काल सर्वे कराया जाए। फसल क्षति का वास्तविक आकलन करते हुए पात्र किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के प्रावधानों के अंतर्गत नियमानुसार उचित मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाए। सर्वे में देरी होने से किसानों की परेशानी बढ़ सकती है, इसलिए प्रशासन को समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।चन्द्राकर ने धान खरीदी व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण मांग रखी। उन्होंने कहा कि खेतों में गिर चुकी फसल को लेकर किसान पहले से परेशान हैं। ऐसे में खरीदी के दौरान नमी के कारण धान अस्वीकार होने की आशंका उनकी मुश्किलें और बढ़ा सकती है। शासन को नियमानुसार आवश्यक परीक्षण और गुणवत्ता संबंधी प्रावधानों का पालन करते हुए प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए नमी में उचित छूट के विकल्प पर विचार करना चाहिए, ताकि उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।उन्होंने कहा कि खेती की लागत बढ़ने और कर्ज के दबाव के बीच फसल खराब होना किसानों के लिए दोहरी मार है। ऐसे समय में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझे और राहत प्रक्रिया को प्रभावी बनाए।भूपेन्द्र चन्द्राकर ने शासन, प्रशासन और संबंधित विभागों से आग्रह किया कि प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का तत्काल जायजा लेकर सर्वे, बीमा दावा और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समय पर सहायता मिलनी चाहिए, ताकि वे इस प्राकृतिक संकट से उबरकर अगली खेती की तैयारी कर सकें।

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