हमर छत्तीसगढ़

शिक्षा मंत्री से भेंट में विद्यालय की प्रमुख समस्याओं पर डॉ. हरिकृष्ण गंजीर ने किया चर्चा

बालोद। छत्तीसगढ़ शासन के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से डॉ. हरिकृष्ण गंजीर, अध्यक्ष शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मोहारा एवं सभापति संचार संकर्म तथा निर्माण समिति जनपद पंचायत गुरुर ने सौजन्य मुलाकात कर विद्यालय की गंभीर समस्याओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि मोहारा का यह विद्यालय वर्ष 2006 से संचालित हो रहा है, लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भवन का निर्माण नहीं हो पाया है। बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है, फिर भी कक्षाओं की व्यवस्था पुराने भवनों और अस्थायी कक्षों में ही चल रही है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

बैठक में मंत्री महोदय के समक्ष स्पष्ट किया गया कि विद्यालय के लिए पांच एकड़ भूमि उपलब्ध है, परंतु उस क्षेत्र में खेल मैदान का समुचित प्रावधान नहीं है। विद्यार्थियों को शारीरिक शिक्षा और खेलकूद गतिविधियों के लिए समतल खेल मैदान की सख्त आवश्यकता है। इसलिए खेल मैदान के समतलीकरण के लिए आवश्यक धनराशि स्वीकृत करने का अनुरोध किया गया। यह भी कहा गया कि खेल सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण प्रतिभाएं उभर नहीं पा रही हैं और प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर सीमित रह जाता है।

शैक्षणिक दृष्टिकोण से भी विद्यालय में गंभीर कमी सामने रखी गई। राजनीति शास्त्र और वाणिज्य विषय के व्याख्याता पद वर्षों से रिक्त हैं, जिसके कारण छात्रों को उच्च शिक्षा हेतु अन्यत्र जाना पड़ता है। इस परिस्थिति से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। मंत्री से निवेदन किया गया कि इन रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जाए, ताकि छात्रों को नियमित मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो सके।

इस अवसर पर भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ जिला बालोद के संयोजक रोहित कुमार साहू, ग्राम पंचायत मोहारा के पूर्व सरपंच बोधराय हिरवानी, बूथ अध्यक्ष मोहारा धर्मेंद्र तेल्यासी तथा शासकीय माध्यमिक विद्यालय मोहारा के सदस्य गणपत राम साहू भी उपस्थित रहे। सभी प्रतिनिधियों ने मिलकर शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि मोहारा विद्यालय की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए, ताकि ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक और खेल सुविधाएं मिल सकें।

यह मुलाकात न केवल एक विद्यालय की समस्याओं को उजागर करने का अवसर बनी बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु सामूहिक प्रयास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी साबित हुई।

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