धान खरीदी में सरकार के वादों का शोर, लेकिन बालोद प्रशासन की नाकामी का जख्म अभी ताजा 15 नवम्बर को फिर होगा असली इम्तिहान
धान खरीदी में सरकार के वादों का शोर, लेकिन बालोद प्रशासन की नाकामी का जख्म अभी ताजा 15 नवम्बर को फिर होगा असली इम्तिहान

धान खरीदी में सरकार के वादों का शोर, लेकिन बालोद प्रशासन की नाकामी का जख्म अभी ताजा 15 नवम्बर को फिर होगा असली इम्तिहान

बालोद:- पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कट्टर समर्थक राजेश साहू सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण प्रेमी और पूर्व जनपद सदस्य ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 15 नवम्बर से धान खरीदी शुरू होने जा रही है। सरकार दावा कर रही है कि इस बार टोकन वितरण में पारदर्शिता होगी, बोरी की कोई कमी नहीं रहेगी और किसानों को समय पर भुगतान मिलेगा। कागज़ों पर सब कुछ परफेक्ट है, मगर किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है – क्या बालोद का जिला प्रशासन इस बार भी वही पुरानी लापरवाहियाँ दोहराएगा?क्योंकि पिछले साल हालात किसी “प्रशासनिक आपदा” से कम नहीं थे। किसानों का धान खुले में सड़ता रहा, टोकन के नाम पर खेल चलता रहा और महीनों तक भुगतान टाल दिया गया। किसानों की नाराज़गी आज भी जस की तस है। एक किसान ने कटाक्ष करते हुए कहा – “हम लाइन में खड़े रहे, धान भीगता रहा, लेकिन अफसरों की कुर्सियाँ सूखी रहीं।”प्रशासन की सुस्ती और समिति प्रबंधन की मिलीभगत ने दलालों को मालामाल कर दिया। किसानों का दर्द साफ झलकता है – “हमें न्यूनतम समर्थन मूल्य तो नहीं मिला, लेकिन दलालों ने न्यूनतम कीमत पर हमारा खून चूस लिया।

”बालोद में यह चर्चा आम रही कि जिला प्रशासन जानबूझकर आँखें मूँदकर बैठा रहा ताकि बिचौलियों का खेल चलता रहे।अब सरकार फिर से वही पुराने वादे दोहरा रही है—ऑनलाइन भुगतान, डिजिटल टोकन, सख्त निगरानी। लेकिन किसानों का भरोसा टूटा हुआ है। उनका कहना है कि “वादों से खेत नहीं भरते, समय पर पैसा और सुरक्षा चाहिए।” यही वजह है कि 15 नवम्बर को खरीदी की शुरुआत उत्साह से ज्यादा आशंका का माहौल लेकर आ रही है।असल सवाल यही है कि क्या इस बार जिला प्रशासन जिम्मेदारी निभाएगा या फिर वही पुराना खेल होगा? क्योंकि बालोद के किसानों ने ठान लिया है कि वे अब चुप नहीं बैठेंगे। अगर धान खरीदी में गड़बड़ी दोहराई गई तो गुस्से का तूफ़ान सीधे प्रशासन की मेज़ पर गिरेगा।




