हमर छत्तीसगढ़
मनीराम का नरक साम्राज्य डौंडीलोहारा में बिजली विभाग का खूनी तांडव

मनीराम का नरक साम्राज्य डौंडीलोहारा में बिजली विभाग का खूनी तांडव
बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिला के डौंडीलोहारा में बिजली विभाग अब काल का मशीन बन चुका है जहां मनीराम तराम नाम का ‘राक्षस’ राज करता है। सूत्र बताते हैं कि यह वही खलनायक है, जिसके भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़कर मासूम बच्चे, मेहनतकश किसान और बेकसूर परिवार चिता की आग में जल गए हैं। टूटे तारों से लटकती मौत, खराब ट्रांसफॉर्मरों की चिंगारी से झुलसते जिस्म—ये मनीराम का ‘शाप’ है, जो डौंडीलोहारा की धरती पर काला साया बनकर मंडरा रहा है। फिर भी, विभागीय संरक्षण की मोटी चादर ओढ़े यह ‘कालपुरुष’ कुर्सी पर जमकर जनता की लाशों पर रोटियां सेंक रहा है। छत्तीसगढ़ में बिजली, जो जीवन की रोशनी लानी थी, वह मनीराम के हाथों मौत का फंदा बन चुकी है।सोचिए, एक मां अपने 10 साल के मासूम कुणाल को गले लगाकर आखिरी बार लाड़ करती है। बच्चा घर के बाहर खेलने जाता है, और पलक झपकते ही टूटा बिजली का तार उसकी सांसें छीन लेता है। मां बाप की गोद सूनी भाई-बहन बिलखते रह गए। यह दर्दनाक मंजर हाल ही में बालोद में सच हुआ। लेकिन मनीराम जैसे राक्षसों को क्या फर्क? उनकी आंखों पर घूस की काली पट्टी और कानों में रिश्वत की माला चढ़ी है। ग्रामीणों की चीखें उनके लिए हंसी का पात्र हैं। खुले जोड़, जर्जर खंभे, बिना मरम्मत के लटकते तार—यह सब मनीराम की ‘निगरानी’ का नमूना है। शिकायतें दर्ज होती हैं, मगर घूस की भट्टी में जलकर राख हो जाती हैं। ठेकेदारों से वसूली का गंदा खेल चलता है—बिना कार्य आदेश, बिना गुणवत्ता जांच के फर्जी बिल पास। गांव अंधेरे की कब्र में दफन होते हैं। लेकिन इनके महल चमकते रहते हैं मनीराम का काला कारोबार सिर्फ लापरवाही नहीं है खुला कत्लेआम है। रखरखाव के नाम पर ठेकेदार लूटे जाते हैं, और सुरक्षा को कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है। नतीजा? मासूमों की लाशें और बिलखते परिवार। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भी इस नरसंहार पर सख्ती दिखाई—एक मामले में मुआवजा 7.68 लाख तक बढ़ाया, क्योंकि बिजली विभाग पर ‘कठोर दायित्व’ है। मगर मनीराम जैसे राक्षसों के लिए यह आदेश हवा में उड़ता कागज है। हाल ही में बालोद में करंट से कई जानें गईं—सब इस विभाग की लापरवाही की भेंट। कागजात अलमारियों में सड़ते हैं, और मनीराम की हवेली चमकती है।
सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद की आवाज में दर्द और गुस्सा है उसने कहा कि”यह विभाग श्मशान है, जहां मनीराम जैसे लोग लाशों पर नाच रहे हैं! कितने बच्चे अनाथ हुए, कितनी माएं बिलख रही हैं, मगर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ सन्नाटा! सरकार चेते, वरना जनता सड़कों पर उतरेगी। ये खूनखोर जेल में सड़ने के हकदार हैं!” निषाद का गुस्सा जायज है। एक्स पर जनता चीख रही है—मनीराम को ‘भ्रष्टाचार का राक्षस’ बुलाया जा रहा, जो अंधेरा बांटकर अपनी तिजोरी भरता है।अब बस बहुत हुआ! मनीराम का यह खूनी खेल बंद हो। निलंबन नहीं, सीधे जेल, संपत्ति जब्ती और कठोर सजा चाहिए। बालोद की जनता अब चुप नहीं रहेगी। मांओं की गोद सूनी करने वाले, बच्चों की सांसें छीनने वाले इस राक्षस का अंत जरूरी है। सरकार, जागो!मनीराम का नरक साम्राज्य ढहाओ, वरना जनता का लावा फटेगा, और यह भ्रष्टाचार की हवेली जलकर राख होगी!



