अरकार गांव में गांजा का काला साम्राज्य भ्रष्ट प्रशासन की मिलीभगत पर तीखा प्रहार!

रिपोर्टर:- रिखी साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरूर विकासखंड में विधायक आदर्श ग्राम पंचायत अरकार को नर्क बना रहा है! यहां शासकीय शराब दुकान के नाम पर तो बस दिखावा है, लेकिन असली खेल तो अवैध गांजा और शराब का काला कारोबार है, जो बेखौफ धड़ल्ले से चल रहा है। ये नशे के सौदागर, ये मौत के व्यापारी, गांव की आत्मा को चूस रहे हैं, और ऊपर से नीचे तक का प्रशासन इनकी जेब में है! शर्म आनी चाहिए इन भ्रष्ट अफसरों को, जो आबकारी विभाग के नाम पर इन अपराधियों को संरक्षण दे रहे हैं। ये गोरखधंधा नहीं, ये गांव की हत्या है!देखिए, विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि गांव का ही वो शैतान दिलीप कोसरे, पिता चंद्र कुमार कोसरे, खुलेआम गांजा बेच रहा है। होलसेलर बनकर दिन-रात मौत का सामान सप्लाई कर रहा है! चिल्हर बेचने वालों को माल देता है, और गांव में संदिग्ध लफंगों का जमावड़ा लगा रहता है। माताएं-बहनें डर के साए में जी रही हैं, अनहोनी की आशंका से कांप रही हैं। स्कूली बच्चियां रास्तों पर चलने से घबराती हैं, क्योंकि ये नशेड़ी हर कोने में घात लगाए बैठे हैं। खेतों में काम करने वाली महिलाएं क्या सोचती होंगी? ये गांजा डीलर नहीं, ये गांव का दुश्मन है, जो पूरे इलाके को नशे की लत में धकेल रहा है। आसपास के गांवों तक ये जहर फैल रहा है, और पूरा क्षेत्र अशांत हो चुका है। ये अपराधी की वजह से नौजवान बर्बाद हो रहे हैं, परिवार टूट रहे हैं, और समाज का ताना-बाना छिन्न-भिन्न हो रहा है!अब सवाल ये है कि शासन-प्रशासन कहां सो रहा है? एक तरफ तो वे दिखावटी चेकिंग करते हैं, वाहनों की तलाशी लेते हैं, धान खरीदी के नाम पर सख्ती दिखाते हैं। लेकिन इन गांजा तस्करों के ट्रकों को कौन छूट दे रहा है? साफ है, आबकारी विभाग के भ्रष्ट अधिकारी इनके साथ मिले हुए हैं! कार्यवाही होती है तो बस नाम की, चंद दिनों बाद फिर वही काला धंधा शुरू। ये क्या मजाक है? ये लालची अफसर, ये बिकाऊ पुलिस, ये निकम्मे प्रशासक – सब मिलकर गांव को लूट रहे हैं। ग्रामीणों की शिकायतें अनसुनी, उनकी दहशत अनदेखी! सरपंच बल्ला देवांगन ने सही कहा – गांव दूषित हो चुका है, शांति भंग हो चुकी है। लेकिन ये व्यक्ति बार-बार गांजा बेचना शुरू कर देता है, क्योंकि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत है। ये भ्रष्टाचार की जड़ है, ये सिस्टम का कैंसर है!पुलिस थाना प्रभारी कहते हैं कि वे जनसेवक हैं, जानकारी दो तो कार्यवाही करेंगे। अरे भाई, क्या ग्रामीणों को हर बार सबूत लाकर थाली में सजाकर देना पड़ेगा? क्या आपकी आंखें बंद हैं? क्या आपकी जेबें भरी हुई हैं? ये दिखावटी बयानबाजी बंद करो! त्वरित कार्यवाही की बात करते हो, लेकिन हकीकत में ये अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं। ये पुलिस नहीं, ये अपराधियों के रक्षक हैं! शासन को चेतावनी – अगर ये काला कारोबार नहीं रुका, तो जनता सड़कों पर उतरेगी। ये गांजा डीलर दिलीप कोसरे को जेल की सलाखों के पीछे डालो, उसके साथियों को कुचलो, और भ्रष्ट अधिकारियों को बेनकाब करो!ये सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, ये पूरे सिस्टम की सड़ांध है। नशे के ये सौदागर गांव की जवानी चुरा रहे हैं, महिलाओं की इज्जत खतरे में डाल रहे हैं, और प्रशासन चुपचाप तमाशा देख रहा है। उठो, जागो, और इन शैतानों पर प्रहार करो! ये समय है सख्ती का, कठोर कार्यवाही का। अगर अब भी नहीं चेते, तो ये भ्रष्ट तंत्र खुद को बर्बाद कर लेगा। गांव बचाओ, समाज बचाओ – गांजा के इन जहरखोरों को नेस्तनाबूद करो!”



