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रैली से राहत मिलेगी या सख्ती से बचेगी जान? बालोद में सड़क सुरक्षा अभियान पर बहस

 

बालोद:- नए वर्ष के पहले दिन बालोद जिले में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह का शुभारंभ बड़े स्तर पर किया गया। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की संयुक्त पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और नगर पालिका अध्यक्ष की उपस्थिति रही। भारत सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय की गाइडलाइन के तहत जागरूकता रथ को रवाना किया गया, हेलमेट रैली आयोजित हुई और आम नागरिकों को सुरक्षित ड्राइविंग के संदेश दिए गए।कार्यक्रम के दौरान “सेल्फी विथ हेलमेट” जैसी गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को जोड़ने की कोशिश की गई। सड़क सुरक्षा मित्रों को सम्मानित किया गया और बताया गया कि वे आमजन को नियमों के पालन के लिए प्रेरित करेंगे। प्रशासन ने यह भी घोषणा की कि पूरे माह स्कूलों में विभिन्न प्रतियोगिताएं, लाइसेंस शिविर, स्वास्थ्य परीक्षण और स्वयंसेवी संगठनों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।इन आयोजनों के बावजूद जिले के नागरिकों के मन में यह आशंका बनी हुई है कि क्या यह अभियान वास्तविक बदलाव ला पाएगा। बालोद की सड़कों पर रोजाना होने वाली दुर्घटनाएं, बिना सुरक्षा उपकरणों के वाहन चलाना, नशे में ड्राइविंग, नाबालिगों को वाहन सौंपना और यातायात व्यवस्था की कमजोर स्थिति गंभीर समस्या बनी हुई है। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या इन समस्याओं का समाधान केवल प्रतीकात्मक कार्यक्रमों से संभव है। पूर्व के अनुभव बताते हैं कि ऐसे अभियानों के दौरान कुछ समय के लिए नियमों का पालन बढ़ जाता है, लेकिन बाद में स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। स्थायी समाधान के लिए निरंतर चेकिंग, कड़े दंड और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। यदि नियम तोड़ने वालों को पूरे साल समान सख्ती का सामना करना पड़े, तभी व्यवहार में बदलाव संभव है।विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा केवल जागरूकता का विषय नहीं बल्कि बुनियादी ढांचे से भी जुड़ा हुआ है। खराब सड़कों की मरम्मत, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुधार, पर्याप्त स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक सिग्नल और संकेतक लगाए बिना हादसों में कमी लाना मुश्किल है।भाजपा जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख ने कहा कि सड़क सुरक्षा को केवल एक महीने का अभियान मानना गलत होगा। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाएं आंकड़ों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि परिवारों को तबाह कर देती हैं। उनके अनुसार सरकार और संगठन मिलकर इसे स्थायी जनआंदोलन का रूप देना चाहते हैं, ताकि बालोद को सुरक्षित जिला बनाया जा सके।दूसरी ओर कांग्रेस जिलाध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी ने प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा माह के नाम पर कोई ठोस कार्ययोजना सामने नहीं आई है। उन्होंने न तो हेलमेट अभियान की स्पष्ट दिशा देखी और न ही नशे में वाहन चलाने वालों पर सख्ती को लेकर कोई मजबूत संदेश।कुल मिलाकर बालोद में शुरू हुआ सड़क सुरक्षा माह तभी सफल माना जाएगा जब यह सिर्फ फोटो, रैली और भाषणों तक सीमित न रहे। आम जनता अब परिणाम चाहती है, घोषणाएं नहीं। यदि प्रशासन इस अभियान को जमीन पर उतारने में सफल होता है, तो ही सड़कों पर जान बचाने का भरोसा बन पाएगा।

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