हमर छत्तीसगढ़

किसानों के हक पर हमला बर्दाश्त नहीं! समर्थन मूल्य की अनदेखी पर छत्तीसगढ़ क्रांति सेना का हुंकार — सनौद अटल चौक पर चक्का जाम से प्रशासन में हड़कंप

रिपोर्टर:- उत्तम साहू

बालोद/पलारी:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में किसानों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आज छत्तीसगढ़ क्रांति सेना ने सड़क पर उतरकर ऐसा सख्त संदेश दिया, जिसे अनसुना करना अब प्रशासन के लिए नामुमकिन हो गया है। गुण्डरदेही–धमतरी मुख्य मार्ग पर गुरूर ब्लॉक में बसे ग्राम सनौद के अटल चौक में क्रांति सेना ने चक्का जाम कर सरकार और प्रशासन की संवेदनहीन नीतियों के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। मुद्दा साफ है—धान खरीदी केंद्रों में समर्थन मूल्य के लिए टोकन नहीं काटे जा रहे, जिससे किसान दर-दर भटकने को मजबूर हैं।यह आंदोलन किसी राजनीतिक दिखावे का हिस्सा नहीं, बल्कि खेतों में पसीना बहाने वाले अन्नदाता की पीड़ा की सीधी आवाज है। जब किसान अपनी उपज लेकर खरीदी केंद्र पहुंचता है और उसे यह कहकर लौटा दिया जाता है कि “टोकन नहीं है”, तब उसका आत्मसम्मान टूटता है। महीनों की मेहनत, कर्ज का बोझ, घर की जिम्मेदारी—इन सबके बीच टोकन न मिलना किसानों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।छत्तीसगढ़ क्रांति सेना ने इस अन्याय को चुपचाप सहने से साफ इनकार कर दिया। संगठन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समर्थन मूल्य किसानों का अधिकार है, कोई भीख नहीं। सरकार की नीतिगत विफलता और प्रशासनिक लापरवाही ने किसानों को सड़क पर आने को मजबूर किया है। अगर सिस्टम समय रहते नहीं जागा, तो यह आग और भड़केगी।
चक्का जाम के दौरान अटल चौक पर गूंजते नारे इस बात का प्रमाण थे कि किसान अब डरने वाला नहीं है। क्रांति सेना ने छत्तीसगढ़िया अस्मिता और किसान स्वाभिमान को केंद्र में रखते हुए आंदोलन को धार दी। यह केवल धान का सवाल नहीं, बल्कि किसान की इज्जत, उसकी आजीविका और उसके भविष्य की लड़ाई है।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार बड़े-बड़े मंचों से किसान हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे ठीक उलट है। खरीदी केंद्रों की अव्यवस्था, टोकन प्रणाली की खामियां और अधिकारियों की उदासीनता ने किसान को अपमानित किया है। क्रांति सेना ने चेताया कि यदि तुरंत प्रभाव से टोकन कटना शुरू नहीं हुआ और समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित नहीं की गई, तो आंदोलन और उग्र होगा।
सनौद में हुआ चक्का जाम सत्ता के गलियारों के लिए चेतावनी है। यह संदेश है कि छत्तीसगढ़ का किसान अब चुप नहीं बैठेगा। छत्तीसगढ़ क्रांति सेना ने किसानों का हमदर्द बनकर यह साबित कर दिया है कि जब तक खेत का पसीना उसकी सही कीमत नहीं पाएगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। यह लड़ाई अधिकार की है, और इस लड़ाई में क्रांति सेना पूरी ताकत के साथ किसानों के साथ खड़ी है।

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