हमर छत्तीसगढ़

राजनीतिक धौंस के साये में कुचली जा रही एक विधवा की गरिमा — अवैध कब्जे से बंद नाली, सड़ांध में जीने को मजबूर माँ-बेटी”

 

बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिला के दल्ली राजहरा, वार्ड क्रमांक 24 में 62 वर्षीय विधवा महिला श्रीमती चित्ररेखा साहू, जो पिछले 70 वर्षों से इसी मोहल्ले में निवासरत हैं, आज अपने ही घर के सामने गंदे पानी, दुर्गंध और भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि क्या एक असहाय विधवा और उसकी युवा पुत्री को सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार भी अब “राजनीतिक पहुंच” की बपौती बन चुका है?घर के सामने से वर्षों पुरानी सार्वजनिक नाली गुजरती है, जिससे बरसाती व घरेलू पानी का निकास होता रहा है। लेकिन बीते डेढ़ वर्षों से पड़ोसी रवि व संगीता देवांगन ने खुलेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए नाली पर फर्शीकरण कर कब्जा जमा लिया और उस पर पौधा रोपकर उसे स्थायी रूप से बंद कर दिया। नतीजा—गंदा पानी जाम, चारों ओर सड़ांध, मच्छर, बीमारी और नारकीय जीवन जीने पर मजबूर कर दिया है।यह कोई साधारण पड़ोसी विवाद नहीं, बल्कि सत्ता की धौंस, प्रशासनिक उदासीनता और मानवीय संवेदनहीनता का घिनौना उदाहरण है। विडंबना यह है कि पीड़िता ने शोर-शराबा नहीं किया, बल्कि बार-बार विनम्र निवेदन किया। लेकिन जवाब में मिला क्या?धमकी, गाली-गलौज, झगड़ा और “ऊँची राजनीतिक पहुंच” की खुली चेतावनी।यही नहीं, जब नगर पालिका द्वारा दो बार सफाई कर्मियों को भेजा गया, तो उन्हें भी रोक दिया गया। क्या यह कानून का खुला अपमान नहीं? क्या यह प्रशासन को सीधी चुनौती नहीं?हद तो तब हो गई जब पीड़िता के विरुद्ध ही राजहरा थाने में शिकायत दर्ज कराने और एफ.आई.आर. करवाने का प्रयास किया गया। अपराधी कौन और आरोपी कौन—यह उलटबासी अपने आप में सिस्टम पर तमाचा है। थाने में तथाकथित “समझौता” तो कराया गया, लेकिन दबाव, धमकी और राजनीतिक धौंस का खेल बदस्तूर जारी है। यह समझौता नहीं, बल्कि कमजोर पर अत्याचार की मुहर है।
सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि पीड़िता एक विधवा, असहाय महिला है, जिसके साथ केवल उसकी युवा पुत्री रहती है। इसी कमजोरी को हथियार बनाकर जान-माल की धमकी दी जा रही है। सवाल उठता है—क्या कानून सिर्फ ताकतवरों के लिए है?क्या एक माँ-बेटी का जीवन इतना सस्ता है कि उन्हें गंदे पानी और डर के साये में छोड़ दिया जाए?यह मामला केवल नाली का नहीं, न्याय, सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी का है। यदि आज इस अवैध कब्जे को नहीं हटाया गया, यदि धमकाने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि गरीब, विधवा और निर्बल नागरिकों के लिए कानून सिर्फ कागजों में है।अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागें।अवैध रूप से बंद की गई नाली को तत्काल खुलवाया जाए।धमकी देने वालों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई हो।और सबसे अहम—इस असहाय माँ-बेटी को सुरक्षा का भरोसा दिया जाए।क्योंकि अगर प्रशासन अब भी खामोश रहा, तो यह खामोशी अपराध में भागीदारी मानी जाएगी।

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