हमर छत्तीसगढ़

सड़कों पर अव्यवस्थित खड़े हाईवा वाहनों से दुर्घटनाओं की आशंका प्रशासनिक सख्ती के बावजूद यातायात सुधार बड़ी चुनौती

 

रिपोर्टर:- उत्तम साहू

बालोद/पलारी:-छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में गुरूर विकासखंड अंतर्गत नगर पंचायत पलारी क्षेत्र इन दिनों सड़क सुरक्षा की दृष्टि से चिंता का विषय बनता जा रहा है। यह क्षेत्र कई प्रमुख मार्गों से जुड़ा हुआ है और यहां से कांकेर, बस्तर, धमतरी, राजनांदगांव, दुर्ग और रायपुर की ओर जाने वाले वाहन लगातार गुजरते रहते हैं। भारी वाहनों की बढ़ती आवाजाही के बीच स्थानीय लोगों ने सड़क किनारे अव्यवस्थित रूप से खड़े हाईवा वाहनों को दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बताया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पलारी से गुण्डरदेही मार्ग तथा आसपास के संपर्क मार्गों पर रेत और मुरूम से भरे वाहन अक्सर सड़क किनारे खड़े कर दिए जाते हैं। कई स्थानों पर सड़क पहले से संकरी है, ऐसे में इन वाहनों की पार्किंग से रास्ता और छोटा हो जाता है। मोड़, पुलिया और आबादी वाले हिस्सों में खड़े ट्रक अन्य वाहन चालकों के लिए अचानक बाधा बन जाते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि रात के समय खनिज परिवहन करने वाले वाहनों की संख्या अधिक हो जाती है। कई चालक तेज गति से वाहन चलाते हैं और दिशा बदलते समय संकेतक का उपयोग नहीं करते। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सामने से आ रहे दोपहिया और छोटे वाहन चालक अचानक सामने खड़े ट्रकों को देखकर घबरा जाते हैं, जिससे संतुलन बिगड़ने की स्थिति बन जाती है।

हालांकि इन आरोपों की प्रशासनिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। लोगों ने मांग की है कि संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां नियमित गश्त, पार्किंग नियंत्रण और निगरानी की व्यवस्था की जाए।

प्रशासन का कहना है कि अवैध खनिज परिवहन, ओवरलोडिंग और यातायात नियम उल्लंघन के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा संयुक्त जांच अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनमें दस्तावेज जांच, चालानी कार्रवाई और वाहन जब्ती जैसी कार्यवाही शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि सड़क अनुशासन बनाए रखने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती। वाहन चालकों को निर्धारित स्थान पर ही वाहन खड़ा करना चाहिए, गति सीमा का पालन करना चाहिए और मोड़ पर संकेतक का उपयोग करना चाहिए। साथ ही स्थानीय नागरिकों को भी सतर्क रहना होगा और नियमों के पालन में सहयोग करना होगा। सामूहिक प्रयास से ही सड़क सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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