आत्मरक्षा प्रशिक्षण से बेटियों में जगा साहस, अब डर नहीं — मुकाबला होगा

वीरता की विरासत, सुरक्षा की शक्ति
बालोद:- छत्तीसगढ़ के जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में चलाया गया रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि बेटियों के मन में साहस, आत्मसम्मान और सुरक्षा का संकल्प जगाने वाला अभियान साबित हुआ। एक माह तक चले इस विशेष प्रशिक्षण ने छात्राओं को यह विश्वास दिया कि वे केवल पढ़ने वाली छात्राएं ही नहीं, बल्कि अपने सम्मान की रक्षा करने वाली सजग नागरिक भी हैं।
प्रशिक्षण का उद्देश्य स्पष्ट था — छात्राओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाना, उन्हें आत्मरक्षा की व्यावहारिक तकनीकें सिखाना और समाज में बढ़ती छेड़छाड़ की घटनाओं के विरुद्ध उन्हें तैयार करना। प्रशिक्षक ने छात्राओं को 10 से 15 महत्वपूर्ण आत्मरक्षा तकनीकें सिखाईं, जिनमें अचानक हमले से बचाव, पकड़ से छूटना, संतुलन बनाना, और आवाज उठाकर मदद जुटाना जैसी व्यावहारिक विधियाँ शामिल रहीं।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं में जो उत्साह, अनुशासन और सीखने की ललक दिखाई दी, वह इस बात का संकेत है कि बेटियाँ अवसर मिलने पर खुद को मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
विद्यालयों के प्राचार्यों ने भी माना कि यह कार्यक्रम केवल शारीरिक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास का माध्यम बना। इससे छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ा, निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हुई और कठिन परिस्थितियों में संयम बनाए रखने का अभ्यास विकसित हुआ।
छात्राओं ने कहा कि प्रशिक्षण ने उनके सोचने का तरीका बदल दिया है। अब वे खुद को कमजोर नहीं मानतीं, बल्कि जागरूक और सक्षम महसूस करती हैं। व्यायाम, अनुशासन, खेलकूद और मनोरंजक गतिविधियों के साथ मिला यह प्रशिक्षण उन्हें शारीरिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी मजबूत कर गया।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि छात्राओं ने इसे एक बार का कार्यक्रम न मानते हुए हर वर्ष आयोजित करने की मांग की। उनका मानना है कि यदि यह प्रशिक्षण निरंतर चलता रहा तो आने वाली पीढ़ियाँ डर के माहौल में नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना के साथ आगे बढ़ेंगी।
निश्चित ही यह पहल केवल विद्यालयों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश है — जब बेटियाँ सशक्त होती हैं, तभी समाज सुरक्षित बनता है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर रोक लगाने की दिशा में ठोस कदम हैं और यह साबित करते हैं कि सुरक्षा केवल कानून से नहीं, जागरूकता और तैयारी से भी आती है।



