तेलघानी परंपरा को नई दिशा बालोद में उच्चस्तरीय समीक्षा, आत्मनिर्भरता पर जोर

रिपोर्टर:- उत्तम साहु
बालोद :- छत्तीसगढ़ के जिला बालोद में तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार साहू ने संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में अधिकारियों की व्यापक समीक्षा बैठक लेकर परंपरागत तेलघानी व्यवसाय से जुड़े लघु उद्यमियों और तिलहन उत्पादक किसानों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान हेतु संचालित योजनाओं की गहन पड़ताल की। बैठक का मूल उद्देश्य पारंपरिक कौशल को आधुनिक बाजार से जोड़ते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना और गुणवत्तापूर्ण खाद्य तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करना रहा।अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए शुद्ध और पोषक तेल का सेवन अत्यावश्यक है। बोर्ड द्वारा विद्यालयों, छात्रावास-आश्रमों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक उच्च गुणवत्ता वाला तेल उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस पहल की जा रही है, जिससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हो और स्थानीय उत्पादकों को स्थायी बाजार मिले।बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष तोमन साहू, कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा, संयुक्त कलेक्टर मधुहर्ष, डिप्टी कलेक्टर प्राची ठाकुर सहित जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।समीक्षा के दौरान पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कृषि, उद्योग, आदिम जाति, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, कौशल विकास, उद्यानिकी, अत्यांवसायी वित्त एवं विकास निगम तथा खाद्य सुरक्षा विभाग की प्रगति का विभागवार विश्लेषण किया गया। कृषि विभाग से कुसुम, सरसों तथा अन्य तिलहन फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के उपायों पर विस्तृत जानकारी ली गई। किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज, उन्नत तकनीक और प्रोत्साहन योजनाओं से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया, ताकि उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो और आय दोगुनी करने का लक्ष्य व्यावहारिक रूप ले सके।
उद्योग विभाग को निर्देशित किया गया कि पारंपरिक तेलघानी संचालकों को शासकीय योजनाओं से अधिकतम लाभ दिलाया जाए। जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कर पात्र हितग्राहियों तक जानकारी पहुँचाने पर जोर दिया गया। साथ ही, केंद्र एवं राज्य सरकार की स्वरोजगार और उद्यमिता उन्नयन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों को सुदृढ़ कर ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार सृजन के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। श्रम और रोजगार विभाग को प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को कौशल आधारित कार्य से जोड़ने की रणनीति अपनाने के लिए कहा गया।अध्यक्ष ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना तभी साकार होगी जब ग्रामीण उद्योगों को संगठित समर्थन, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जाए। तेलघानी परंपरा केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार है। समन्वित प्रयासों से यह क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है



