मीनू साहु ने कहा जागरूकता की मशाल बनीं महिलाएं अधिकार, सम्मान और आत्मविश्वास का बुलंद संदेश

रिपोर्टर:- उत्तम साहु
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के पावन अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद की सचिव भारती कुलदीप ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी समाज की प्रगति तभी संभव है जब उसकी महिलाएं शिक्षित, आत्मनिर्भर और जागरूक हों। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून हर महिला को सुरक्षा और न्याय देने के लिए प्रतिबद्ध है, इसलिए किसी भी अन्याय या समस्या की स्थिति में महिलाएं निडर होकर विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर सकती हैं और निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकती हैं।इस दौरान जिले की निर्भीक निडर सच लिखने की दम रखने वाली वरिष्ठ महिला मीडिया कर्मी मीनू साहु ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल एक शब्द नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का आधार है। उन्होंने कहा कि आज की नारी शिक्षा, जागरूकता और आत्मविश्वास के बल पर हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है। समाज और प्रशासन का दायित्व है कि महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे अपनी क्षमताओं का पूर्ण विकास कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि जागरूक महिला ही सशक्त समाज की नींव रखती है।बालोद जिले में महिला जागरूकता और अधिकारों की अलख जगाने वाला एक सार्थक कार्यक्रम आयोजित किया गया। दल्लीराजहरा में आयोजित इस पहल में बड़ी संख्या में महिलाओं की सहभागिता देखने को मिली, जहां उन्हें उनके अधिकारों, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं था, बल्कि महिलाओं के भीतर आत्मविश्वास, सजगता और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा भी जगाना था।इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने महिलाओं को संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों, घरेलू हिंसा से सुरक्षा, कार्यस्थल पर गरिमा की रक्षा तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। वक्ताओं ने कहा कि जब महिलाएं अपने अधिकारों को समझती हैं और उन्हें आत्मविश्वास के साथ प्रयोग करती हैं, तभी समाज में वास्तविक समानता और सम्मान की स्थापना होती है।कार्यक्रम में उपस्थित पैरालीगल वालेंटियरों और समाजसेवियों ने भी महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि जागरूकता ही सबसे बड़ी शक्ति है। जब महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति सजग होती हैं, तब वे न केवल अपने जीवन को सशक्त बनाती हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनती हैं।कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि जब नारी जागरूक और आत्मविश्वासी बनती है, तब समाज की प्रगति की राह स्वयं उज्ज्वल हो जाती है।



