हमर छत्तीसगढ़

पानी पर पहरा या प्यास की सच्चाई? बालोद प्रशासन का सख्त फरमान, अब अवैध जल भंडारण पर कड़ा वार

 

संपादक:- मीनू साहु 

रिपोर्टर:- उत्तम साहु 

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आने वाली गर्मी की तपिश अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन ने पानी को लेकर सख्ती का बिगुल बजा दिया है। जिला कलेक्टर ने पेयजल संकट की आशंका को देखते हुए ऐसा आदेश जारी किया है, जिसने गांव से लेकर शहर तक हलचल पैदा कर दी है। प्रशासन का साफ संदेश है—पानी जीवन है, लेकिन इसकी लूट अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।आदेश के मुताबिक गर्मी के मौसम में हर व्यक्ति तक पर्याप्त पेयजल पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यही वजह है कि अवैध तरीके से पानी जमा करने, गैरकानूनी कनेक्शन लेने और सार्वजनिक जलापूर्ति में बाधा डालने वालों पर अब सख्त निगरानी रखी जाएगी। प्रशासन का मानना है कि कुछ लोगों की लालच भरी हरकतों की वजह से कई बस्तियों में पानी की किल्लत गहराती है, जिसे अब रोका जाना जरूरी है।इस उद्देश्य से जिले में विशेष निगरानी दल बनाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, तहसीलदार और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी मिलकर संभालेंगे। वहीं शहरी इलाकों में राजस्व विभाग के अधिकारी, तहसील प्रशासन, पीएचई विभाग तथा नगर पालिका और नगर पंचायत के अधिकारी संयुक्त रूप से निगरानी करेंगे।प्रशासन का दावा है कि ये टीमें नियमित रूप से जलापूर्ति की स्थिति पर नजर रखेंगी, ताकि किसी भी मोहल्ले या गांव में पेयजल संकट गहराने न पाए। साथ ही यदि कोई व्यक्ति या संस्था अवैध रूप से पानी रोकने या जमा करने की कोशिश करती पाई गई तो उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।हालांकि इस आदेश को लेकर समाज में दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक वर्ग इसे प्रशासन की दूरदर्शिता और जिम्मेदारी मान रहा है, क्योंकि पानी जैसी बुनियादी जरूरत पर नियंत्रण और समान वितरण बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि यदि कुछ लोग जरूरत से ज्यादा पानी रोकेंगे तो कई परिवार प्यासे रह जाएंगे, इसलिए सख्ती जरूरी है।वहीं दूसरी ओर कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं कि हर साल गर्मी आते ही ऐसे आदेश क्यों जारी होते हैं। क्या असली समाधान केवल निगरानी और कार्रवाई है, या फिर जल संरक्षण, नई योजनाएं और बेहतर प्रबंधन पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए?सवाल कई हैं, लेकिन एक सच्चाई स्पष्ट है—पानी पर बढ़ती निर्भरता और घटते संसाधनों के बीच अब जिम्मेदारी हर नागरिक की भी है। प्रशासन का यह कदम चेतावनी भी है और अवसर भी। यदि समाज और सरकार मिलकर पानी बचाने की संस्कृति अपनाएं, तो शायद आने वाली पीढ़ियों को प्यासे भविष्य का सामना न करना पड़े।

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