हमर छत्तीसगढ़

कर्तव्य के आगे रिश्ते भी पड़े छोटे ओरमा की सरपंच मंजूलता साहू की कार्रवाई बनी जिलेभर में चर्चा का विषय

 

संपादक :- मीनू साहू 

बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के ग्राम ओरमा में हुई एक कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जहां अक्सर जनप्रतिनिधियों पर रिश्तेदारों को संरक्षण देने और पक्षपात करने के आरोप लगते हैं, वहीं ओरमा की सरपंच मंजूलता साहू ने ऐसा कदम उठाया जिसकी चर्चा गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक हो रही है।

बताया जा रहा है कि ओरमा निवासी रोहित साहू की शिकायत के बाद जिस निर्माण पर कार्रवाई की गई, वह किसी बाहरी व्यक्ति का नहीं बल्कि सरपंच मंजूलता साहू के पति परस साहू से जुड़ा मकान था। यही तथ्य इस पूरे मामले को विशेष बनाता है। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि एक ही परिवार में रहते हुए भी सरपंच ने अपने दायित्वों को प्राथमिकता दी और व्यक्तिगत संबंधों को निर्णय पर हावी नहीं होने दिया।

गांव के कई लोगों का मानना है कि स्थानीय राजनीति में ऐसे उदाहरण कम देखने को मिलते हैं, जहां कोई निर्वाचित प्रतिनिधि अपने ही परिजनों से जुड़े मामले में निष्पक्षता का परिचय दे। समर्थकों का कहना है कि यदि शिकायत प्राप्त हुई और पंचायत हित प्रभावित हो रहा था, तो सरपंच का दायित्व कार्रवाई सुनिश्चित करना था, चाहे मामला किसी भी व्यक्ति से संबंधित क्यों न हो।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भी कई प्रश्न खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्रवाई की गई तो नोटिस, सूचना और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। प्रशासन की चुप्पी ने अनेक तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है। लोग यह जानना चाहते हैं कि संबंधित विभागों ने नियमों के अनुरूप सभी औपचारिकताएं पूरी की थीं या नहीं।

फिलहाल एक बात स्पष्ट रूप से सामने आ रही है कि ओरमा की सरपंच मंजूलता साहू का यह निर्णय साहस, निष्पक्षता और कर्तव्यनिष्ठा के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। जहां कई लोग रिश्तों के दबाव में निर्णय बदल देते हैं, वहीं इस मामले में यह संदेश उभरकर सामने आया है कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए कानून और दायित्व सर्वोपरि होने चाहिए। इसी वजह से यह घटना आज पूरे जिले में चर्चा और बहस का केंद्र बनी हुई है।

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