हमर छत्तीसगढ़

बोदल के बच्चों का भविष्य भगवान भरोसे! 65 विद्यार्थियों पर केवल 2 शिक्षक

शिक्षा विभाग की चुप्पी से भड़के ग्रामीण—1 सितंबर से तालाबंदी का ऐलान

संपादक:- मीनू साहू 

बालोद :- जिला के विकासखंड गुण्डरदेही अंतर्गत ग्राम बोदल की शासकीय प्राथमिक शाला आज शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर बनकर सामने आई है। शासन एक ओर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सर्वांगीण विकास और बेहतर शैक्षणिक वातावरण के दावे करता नहीं थकता, वहीं दूसरी ओर लगभग 65 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई केवल दो शिक्षकों के भरोसे चल रही है। यह मामला केवल संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि जिम्मेदार विभागीय व्यवस्था की कार्यक्षमता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

विद्यालय में वर्ष 2022-23 से बालवाड़ी का संचालन भी किया जा रहा है। ऐसे में दो शिक्षकों को प्राथमिक कक्षाओं के साथ बालवाड़ी की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ रही है। बच्चों को समान रूप से समय देना, अलग-अलग कक्षाओं को पढ़ाना, शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करना और विद्यालयीन व्यवस्थाएं देखना—इन सभी जिम्मेदारियों का बोझ सीमित स्टाफ पर होना चिंताजनक स्थिति दर्शाता है।

विद्यालय प्रबंधन समिति एवं ग्राम पंचायत द्वारा इस विषय में कई बार संबंधित अधिकारियों से अतिरिक्त शिक्षक उपलब्ध कराने की मांग किए जाने का उल्लेख आवेदन में किया गया है। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई बताई गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार निवेदन के बाद भी शिक्षा विभाग ने अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई, जिसके कारण अब गांव में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 27 जुलाई 2026 को तालाबंदी हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आवेदन के बावजूद यदि एक महीने से अधिक समय बीतने पर भी निराकरण नहीं हुआ, तो यह प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है। आखिर बच्चों की शिक्षा से जुड़ी मांग को प्राथमिकता क्यों नहीं मिली? क्या अधिकारियों के लिए ग्रामीण विद्यालयों की समस्याएं केवल पत्राचार तक सीमित रह गई हैं?

ग्रामवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि 1 सितंबर 2026 से विद्यालय परिसर में तालाबंदी एवं धरना प्रदर्शन किया जाएगा। यह निर्णय बताता है कि स्थानीय लोगों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। यदि आंदोलन की स्थिति निर्मित होती है और पढ़ाई प्रभावित होती है, तो इसकी नैतिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी होगा।

कलेक्टर बालोद से अपेक्षा है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कराई जाए। जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी को विद्यालय की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण करना चाहिए तथा छात्र संख्या के अनुरूप शिक्षक उपलब्धता की समीक्षा करनी चाहिए। यदि कमी प्रमाणित होती है, तो बिना विलंब वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

आज सवाल केवल बोदल गांव का नहीं है, बल्कि उन 65 मासूम बच्चों का है जिनके भविष्य की नींव इसी प्राथमिक विद्यालय से रखी जा रही है। यदि शुरुआती शिक्षा ही शिक्षक अभाव के कारण कमजोर होगी, तो आने वाले वर्षों में उसके परिणाम पूरे समाज को भुगतने पड़ सकते हैं।

शासन को अब यह साबित करना होगा कि शिक्षा केवल घोषणाओं का विषय नहीं, बल्कि वास्तविक प्राथमिकता है। बोदल की शासकीय प्राथमिक शाला में शिक्षक व्यवस्था बहाल करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, एहसान नहीं। अब सभी की निगाहें 1 सितंबर से पहले होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं कि विभाग समाधान देता है या फिर ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

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