बालोद जिला अस्पताल में इलाज से पहले व्यवस्था से जंग 10:40 बजे तक कई डॉक्टर नदारद!
बिजली गुल होते ही चरमराती व्यवस्था, वैकल्पिक इंतजाम तक नहीं; सफाई और मूलभूत सुविधाओं पर उठ रहे गंभीर सवाल, अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली कटघरे में

संपादक:- मीनू साहू
बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में ग्रामीण आबादी बड़ी संख्या में होने के कारण जिला अस्पताल आम लोगों के लिए बेहतर उपचार की सबसे महत्वपूर्ण उम्मीद माना जाता है। दल्ली राजहरा रोड पर कलेक्टर बंगले के आगे स्थित जिला अस्पताल में जिलेभर से मरीज उपचार की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। लेकिन अस्पताल परिसर में नजर आने वाली व्यवस्थाएं मरीजों और उनके परिजनों के लिए राहत से ज्यादा सवाल खड़े करती दिखाई दे रही हैं।
गुरुवार को करीब 10:40 बजे तक अस्पताल में कई डॉक्टरों के मौजूद नहीं होने की स्थिति सामने आई, जिससे उपचार की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के लिए चिकित्सक का समय पर उपलब्ध होना सबसे पहली आवश्यकता है। ऐसे में निर्धारित समय के दौरान चिकित्सकों की अनुपस्थिति का कारण क्या है, इसकी जिम्मेदारी तय कौन करेगा, यह सवाल अस्पताल प्रबंधन से पूछा जाना जरूरी है।
सबसे चिंताजनक स्थिति बिजली व्यवस्था को लेकर सामने आती है। बिजली गुल होने की स्थिति में अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था सक्रिय होनी चाहिए। लेकिन यदि विद्युत आपूर्ति बाधित होते ही व्यवस्थाएं प्रभावित होने लगें और पर्याप्त वैकल्पिक इंतजाम दिखाई न दें, तो यह केवल तकनीकी समस्या नहीं बल्कि आपातकालीन प्रबंधन की तैयारी पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
अस्पताल में उपचार केवल डॉक्टर और दवाइयों तक सीमित नहीं होता। साफ-सफाई, प्रकाश, पेयजल, बैठने की सुविधा, मरीजों की सुविधा और निर्बाध सेवाएं स्वास्थ्य व्यवस्था की बुनियादी जरूरत हैं। यदि इन प्राथमिक सुविधाओं के लिए भी मरीजों को परेशानी उठानी पड़े तो फिर जिला अस्पताल की व्यवस्था पर निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह पूछना स्वाभाविक है।
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के पास हर बीमारी के लिए निजी अस्पतालों का विकल्प उपलब्ध नहीं होता। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए जिला अस्पताल ही सबसे बड़ा सहारा है। ऐसे में यहां की छोटी से छोटी अव्यवस्था भी सीधे मरीज और उसके परिवार पर असर डालती है।
अब सवाल केवल अस्पताल परिसर की स्थिति का नहीं, बल्कि अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था का है। क्या नियमित निरीक्षण होता है? डॉक्टरों की उपस्थिति की वास्तविक जांच कौन करता है? बिजली बंद होने की स्थिति में बैकअप व्यवस्था की समीक्षा कब हुई? साफ-सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं की जवाबदेही किस अधिकारी की है?
जिला अस्पताल आम जनता के भरोसे का संस्थान है। यहां आने वाला मरीज व्यवस्था की कमी का भुगतान अपनी परेशानी से नहीं कर सकता। इसलिए अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना होगा कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए आखिर जमीनी स्तर पर व्यवस्था कब सुधरेगी?



