बालोद में 7 अक्टूबर को गूंजेगा गुस्सा – संविदा भर्ती घोटाले पर मुंडन प्रदर्शन से उठेगा तूफ़ान
बालोद में 7 अक्टूबर को गूंजेगा गुस्सा – संविदा भर्ती घोटाले पर मुंडन प्रदर्शन से उठेगा तूफ़ान

बालोद में 7 अक्टूबर को गूंजेगा गुस्सा – संविदा भर्ती घोटाले पर मुंडन प्रदर्शन से उठेगा तूफ़ान

छत्तीसगढ़ में बालोद जिला कलेक्ट्रेट के सामने इस बार केवल फाइलों की धूल नहीं उड़ने वाली, बल्कि सिर के बाल भी उड़ेंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग की संविदा भर्ती में हुए भ्रष्टाचार की दुर्गंध अब गलियारों से निकलकर सीधे जनता की नाक तक पहुँच चुकी है। इस लापरवाही और धांधली के खिलाफ़ हिंद सेना ने 7 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट पर मुंडन प्रदर्शन का बिगुल बजा दिया है।

प्रदेश मुख्य संयोजक तरुण नाथ योगी ने साफ चेतावनी दी—“अब यह गुस्सा सिर में नहीं, आग बन चुका है। सरकार या तो पारदर्शी जांच कर न्याय दे, अन्यथा जनता खुद सड़कों पर उतरकर सिस्टम का नकाब नोच डालेगी।” उनका कहना था कि यह सिर्फ़ बालोद का सवाल नहीं, बल्कि हर बेरोज़गार युवा की चीख है।

ओबीसी महासभा के यज्ञ देव पटेल ने भी आक्रोश जताते हुए कहा—“जब अफसर अपनी कुर्सी की सुरक्षा में युवाओं के सपनों का गला घोंटते हैं, तो खामोश रहना अपराध है। यह विरोध कोई रस्म-अदायगी नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए आख़िरी चेतावनी है।”इधर, आम आदमी पार्टी ने भी आंदोलन को खुला समर्थन देते हुए कहा कि “जब लोकतांत्रिक व्यवस्था बहरी हो जाए, तब सड़कों पर उतरना ही एकमात्र उपाय बचता है।”

सामाजिक कार्यकर्ता और भारतीय मज़दूर कांग्रेस के संभाग अध्यक्ष मोहन निषाद ने तंज कसते हुए कहा कि “सरकार नौकरी देने का झूठा स्वप्न दिखाती है और अफसर उसे बेच डालते हैं।” वहीं महिला प्रकोष्ठ की हुलसा साहू ने चुटकी ली—“कलेक्ट्रेट के बाहर 7 अक्टूबर को सिर्फ़ सिर के बाल नहीं, भ्रष्ट व्यवस्था का घमंड भी उड़ जाएगा।”यह आंदोलन अब किसी एक संगठन का कार्यक्रम नहीं रहा। यह युवाओं, समाजिक संगठनों और जनता का साझा आक्रोश है। 7 अक्टूबर को बालोद की सड़कें गवाह होंगी कि किस तरह बेरोज़गारों का मौन विद्रोह नारे और प्रदर्शन में बदल जाता है।यह सवाल केवल भर्ती की पारदर्शिता का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य का है। बालोद में उठने वाली यह लहर प्रशासन को आईना दिखाने के लिए तैयार है—सिर के बाल भले झड़ जाएं, लेकिन आवाज़ कभी झुकेगी नहीं।




