शहादत दिवस 20 जनवरी को सामाजिक चेतना एकजुट का सशक्त आयोजन

बालोद:- जय जोहार छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में शहादत दिवस जैसे गौरवशाली और प्रेरणास्पद आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप देने की दिशा में आज संपन्न हुई तैयारी बैठक न केवल सफल रही, बल्कि इसने समाज की संगठित शक्ति, अनुशासन और दूरदर्शिता को भी स्पष्ट रूप से उजागर कर दिया। बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों ने 20 जनवरी के महाआयोजन को लेकर कमर कस ली है और यह संकल्प लिया गया है कि यह आयोजन समाज के इतिहास में एक नई मिसाल बनेगा।बैठक में विभागवार जिम्मेदारियों का स्पष्ट और सुव्यवस्थित वितरण किया गया। स्वागत-सत्कार, मंच व्यवस्था, अनुशासन, यातायात, भोजन, जल, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे प्रत्येक पक्ष के लिए मजबूत और अनुभवी टीमों का गठन किया गया है। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज की संगठन क्षमता और सामूहिक नेतृत्व का जीवंत प्रदर्शन होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों को दिशा और प्रेरणा मिलेगी।इस शहादत दिवस कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक ऊंचाई देने वाली बात यह है कि छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस अवसर पर हमारे माई पहुना के रूप में उपस्थित रहेंगे।

उनके साथ मंत्रीगण, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति इस आयोजन को सामाजिक से शासन स्तर तक एक सशक्त सेतु प्रदान करेगी। यह स्पष्ट संकेत है कि समाज की आवाज, उसकी शहादत और उसके बलिदान को शासन स्तर पर सम्मान और गंभीरता के साथ सुना और स्वीकार किया जा रहा है।हवाई पट्टी मैदान में राष्ट्रीय महासभा के पदाधिकारियों द्वारा पुनः स्थल निरीक्षण किया गया। व्यवस्थाओं को लेकर संतोष और विश्वास व्यक्त किया गया है। अनुमान है कि इस ऐतिहासिक आयोजन में लगभग दो लाख से अधिक जनसमुदाय की सहभागिता हो सकती है। यह संख्या मात्र भीड़ नहीं, बल्कि समाज की चेतना, आस्था और एकजुटता का प्रतीक होगी।डौंडी ब्लॉक सहित आसपास के सभी सामाजिक ब्लॉकों ने यह आश्वासन दिया है कि 20 जनवरी को प्रत्येक घर से समाज के सभी सदस्य कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।

यह संकल्प अपने आप में ऐतिहासिक है, जो बताता है कि शहादत दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि समाज की आत्मा से जुड़ा हुआ अवसर है।समस्त पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समाजजनों से यह सशक्त अपील है कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस आयोजन को ऐतिहासिक सफलता दिलाएं। यह कार्यक्रम केवल आयोजनकर्ताओं का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है। आपकी उपस्थिति, आपका अनुशासन और आपका सहयोग ही इसे यादगार बनाएगा। आइए, शहीदों के बलिदान को नमन करते हुए सामाजिक एकता, स्वाभिमान और संगठन शक्ति का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करें, जिसे आने वाले वर्षों तक गर्व के साथ याद किया जाए।
यह जानकारी समाज की ओर से हमे टीकम ठाकुर ने दिया है



