हमर छत्तीसगढ़

प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद के अध्यक्ष ने प्रदेश के लिए शांति और समृद्धि की कामना लेकर मंदिरों में किया पूजा पाठ

 

बालोद। छत्तीसगढ़ में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रेस रिपोर्टर क्लब के अध्यक्ष तरुण नाथ योगी ने बालोद जिला में स्थित विभिन्न शिव मंदिरों में पहुंचकर जिले की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण के लिए विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव से क्षेत्र के विकास, सामाजिक सद्भाव और नागरिकों के स्वास्थ्य की मंगलकामना की।महाशिवरात्रि के दिन सुबह से ही पूरे जिले के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। हर-हर महादेव और ॐ नमः शिवाय के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा। मंदिरों को फूलों, रोशनी और रंगीन सजावट से सजाया गया था, वहीं भक्तों ने जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और रुद्राभिषेक कर अपनी आस्था प्रकट की।भारत, अर्थात भारत, को सदियों से आस्था और परंपराओं की भूमि माना जाता है, जहां हर त्योहार का अपना आध्यात्मिक महत्व है। महाशिवरात्रि को भगवान शिव की उपासना का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाया जाने वाला यह दिन शिव और शक्ति के पवित्र मिलन का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता यह भी है कि इसी दिन भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले विष को ग्रहण कर सृष्टि की रक्षा की, जिससे वे नीलकंठ कहलाए।जिले का प्रसिद्ध जलेश्वर महादेव मंदिर भी इस अवसर पर श्रद्धालुओं से भरा रहा। स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां पवित्र जल में स्नान करने से त्वचा संबंधी कष्ट दूर होते हैं। महाशिवरात्रि के दिन यहां दूर-दराज़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और विशेष पूजा करते हैं।पूरे बालोद शहर में धार्मिक उत्साह का माहौल देखने को मिला। कई स्थानों पर शोभायात्राएं निकाली गईं, जो नयापारा से होते हुए मधु चौक और घड़ी चौक तक पहुंचीं। कांवड़िए जल लेकर मंदिरों तक पहुंचे और सामूहिक भजन-कीर्तन का आयोजन भी हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में भी रात्रि जागरण और चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व रहा।महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मसंयम, साधना और सकारात्मक सोच का संदेश देने वाला पर्व है। भगवान शिव का सरल और संतुलित स्वरूप हमें सिखाता है कि जीवन में धैर्य, करुणा और सत्य का मार्ग ही स्थायी शांति देता है।
इस प्रकार महाशिवरात्रि का यह पर्व बालोद जिले में भक्ति, एकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक बनकर मनाया गया, जिसने समाज को सद्भाव और विश्वास के सूत्र में बांधने का कार्य किया।

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