हमर छत्तीसगढ़

बालोद में जिला स्तरीय प्रशिक्षण 6-7 मार्च को मिशन मोड में प्रशासनिक अमला जुटा

रिपोर्ट:- मीनू साहू

डिजिटल जनगणना 2027 की तैयारी तेज 

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद  जिले में जनगणना 2027 की तैयारियों ने अब निर्णायक रफ्तार पकड़ ली है। प्रशासन ने पहले चरण — मकानसूचीकरण एवं भवन गणना — को सफल बनाने के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। यह प्रशिक्षण 06 एवं 07 मार्च 2026 को संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में सुबह 10:30 बजे से आयोजित होगा, जबकि 17 मार्च 2026 को एक दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण भी रखा गया है।

यह आयोजन केवल औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि आने वाले राष्ट्रीय आँकड़ा महाअभियान की नींव को मजबूत करने का महत्वपूर्ण चरण है। जनगणना किसी भी राष्ट्र की नीतियों, योजनाओं, संसाधन वितरण और विकास की दिशा तय करने वाली सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है। इसी कारण इस बार पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः डिजिटल माध्यम से संपन्न करने का निर्णय लिया गया है, जिससे पारदर्शिता, सटीकता और गति तीनों सुनिश्चित हों।

प्रशिक्षण में जिले के पर्यवेक्षक, गणनाकार, राजस्व अमला तथा संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल होंगे। उन्हें डिजिटल एप्लिकेशन, डेटा संग्रह पद्धति, सर्वे तकनीक, दस्तावेज सत्यापन, तथा फील्ड प्रबंधन से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। लक्ष्य स्पष्ट है — कोई भी मकान, परिवार या सूचना छूटनी नहीं चाहिए।

प्रथम चरण के अंतर्गत मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 01 मई से 30 मई 2026 तक निर्धारित किया गया है। इस अवधि में गणनाकार घर-घर पहुंचकर भवनों का विवरण, उपयोग की स्थिति, संरचना, सुविधाएं तथा अन्य आवश्यक सूचनाएं दर्ज करेंगे। यह चरण आगे होने वाली जनसंख्या गणना की आधारशिला तैयार करेगा।

द्वारा संचालित इस राष्ट्रीय अभियान को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए विशेष डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इससे न केवल आंकड़ों का संकलन तेज होगा, बल्कि त्रुटियों की संभावना भी बेहद कम रह जाएगी।

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इस बार जनगणना केवल आंकड़ा संग्रह नहीं, बल्कि विकास की दिशा तय करने का उपकरण बनेगी। शहरी विस्तार, ग्रामीण ढांचा, आवासीय जरूरतें, बुनियादी सुविधाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी नीतियों के निर्माण में यही डेटा आधार बनेगा।

बालोद जिले में इस प्रशिक्षण को लेकर अधिकारियों में उत्साह स्पष्ट दिख रहा है। इसे जिम्मेदारी से अधिक राष्ट्रनिर्माण की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन का संदेश साफ है — सटीक जनगणना ही सशक्त योजना का आधार है, और यही मजबूत भारत की दिशा तय करेगी।

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