नाली में गंदगी-कचरे का अंबार, मच्छरों के प्रकोप ने बढ़ाई लोगों की चिंता; स्वच्छता अभियान राशि दीवाल, पोस्टरों पर, सरपंच-सचिव भ्रष्टाचार में व्यस्त।

रिपोर्टर उत्तम साहू
बालोद / पलारी :- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में विकासखंड गुरूर के ग्राम पंचायत ओझागहन जो अपने विशेष कार्यप्रणाली के कारण चर्चा में है। पंचायत ओझागहन सहित आश्रित ग्राम पड़कीभाट के सभी वार्डो में पानी निकासी नाली बना है, जिसमें निरंतर साफ- सफाई नही होने से इन नालियों में जमी गंदगी की वजह से दोनों गांव के निवासी परेशान हैं। कचरे और जमा पानी के साथ-साथ इसमें पनप रहे मच्छरों ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।इन दोनों गॉवों में घरों के सामने बने पानी निकासी नालियों में साफ- सफाई नही होने से अमानक स्तर के गंदगी के साथ असहनीय बदूबों से इन घरों रहवासियों का रहना मुश्किल हो गया है। जहां एक ओर नालियों में जाम हुए पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है, जिसके कारण इन नालियों के पास रहने वाले लोग मच्छर प्रकोप से ज्यादा परेशान है। इन लोगों का कहना है कि यदि इन निकासी नालियों को अविलंब साफ- सफाई नही किया गया तो मच्छरों के काटने से संक्रामक रोगों के प्रकोप से बच नही सकते।ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा, जिनका खमियाजा उन्हें भुगतना पड़ सकता हैं। इन दोनों गॉवों में लगभग सभी वार्डा में नालियों का निर्माण बेतरतीब तरीके से किया गया है। इसके साथ ही नालियों को अधूरा ही छोड़ दिया गया, जिसकी वजह से पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। नालियां जाम हो रही हैं, नालियों का आधी- अधूरी निर्माण के साथ कई स्थानों पर ढंकाई भी नही किया गया है जिसमें छोटे बच्चों के साथ बड़े लोग साथ जानवर भी गिर कर चोटिल हो रहे है।बहरहाल जरूरत है कि, नालियों का सही निर्माण कर पानी की निकासी की व्यवस्था की जाए। इस समस्या का निराकरण नही होने से ग्रामीणों के बीच काफी समस्याएं उत्पन्न हो रहा है, जिनका खमियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वच्छता अभियान अंतर्गत ग्राम पंचायतों को मूलभूत सुविधाओं में उपलब्धता के साथ स्वच्छता अभियान अंतर्गत लाखों रूपये आबंटित कर रहा है लेकिन ग्राम पंचायत ओझागहन के सरपंच श्रीमति गंगा बालक राम साहू एवं सचिव हेमलाल साहू इन स्वच्छता अभियान के मिले राशियों को उपयोग दीवाल, पोस्टरों में लिखकर ही कर रहे जो कि धरातल में नगण्य है।ग्राम पंचायत स्तर पर अक्सर यह देखा जाता है कि योजनाओं के बोर्ड दीवार सजाने के लिए लगा दिए जाते हैं, लेकिन उनकी पठनीयता और उपयोगिता पर ध्यान नहीं दिया जाता। यह प्रवृत्ति न केवल प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि जनता को जानकारी देना प्राथमिकता में शामिल नहीं है। यदि विकास कार्य सचमुच ईमानदारी से हो रहे हैं तो उन्हें छिपाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।विदित हो कि व्यक्तिगत स्वच्छता हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग है, जिसमें स्वच्छता बनाए रखने और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जाने वाली कई प्रथाएँ शामिल हैं। इसमें हानिकारक कीटाणुओं, जीवाणुओं और विषाणुओं के प्रसार को रोकने के लिए अपने शरीर, परिवेश और दैनिक आदतों का ध्यान रखना शामिल है। व्यक्तिगत स्वच्छता का अर्थ समझना और इसके महत्व को पहचानना एक स्वस्थ और अधिक संतुष्टिदायक जीवन की ओर ले जा सकता है। इस आवश्यक पहलू की उपेक्षा के दुश्परिणामों से स्वयं के साथ सभी को भुगतना पड़ता है।अब सवाल साफ है — जब नालियों में गंदगी, हवा में बदबू और बीमारी का डर हो, तब दीवारों पर लिखी स्वच्छता आखिर किस काम की?



