हमर छत्तीसगढ़

सूचना बोर्ड गायब, निर्माण में गंभीर तकनीकी खामियां  ग्राम पंचायत मुंदेरा में गुणवत्ता पर उठे बड़े सवाल

संपादक मीनू साहु

रिपोर्टर :- उत्तम साहु 

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में गुण्डरदेही विकासखंड के ग्राम पंचायत मुंदेरा के धरसा रोड के नाला में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर गंभीर अनियमितताएं और तकनीकी कमियां सामने आ रही हैं। स्थल निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि कार्यस्थल पर आवश्यक सूचना बोर्ड तक स्थापित नहीं किया गया है, जो कि शासकीय निर्माण कार्यों के लिए अनिवार्य प्रावधान माना जाता है। बिना सूचना बोर्ड के किसी भी सार्वजनिक निर्माण का किया जाना पारदर्शिता के सिद्धांतों तथा शासन के निर्धारित दिशा-निर्देशों का प्रत्यक्ष उल्लंघन माना जाता है।निर्माण स्थल की तस्वीरों से यह भी स्पष्ट होता है कि कंक्रीट कार्य में गुणवत्ता का गंभीर अभाव है। सीमेंट-कंक्रीट मिश्रण में उचित अनुपात और तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया प्रतीत होता है। सतह पर बड़े-बड़े गिट्टियों का उभरकर दिखाई देना, मिश्रण का असमान फैलाव तथा समतलता का अभाव यह संकेत देता है कि कार्य मानक तकनीकी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं किया गया। ऐसी स्थिति में यह निर्माण लंबे समय तक टिकाऊ रह पाएगा या नहीं, इस पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है।

प्राथमिक दृष्टि से यह भी प्रतीत होता है कि कार्य के दौरान आवश्यक कम्पेक्शन तथा फिनिशिंग की प्रक्रिया को सही ढंग से नहीं अपनाया गया। यदि निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता नियंत्रण और इंजीनियरिंग मानकों की अनदेखी की गई है, तो यह सीधे-सीधे शासकीय धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आ सकता है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता तथा कार्य निष्पादन की तकनीकी जांच आवश्यक प्रतीत होती है।भारत के विभिन्न शासकीय निर्माण कार्यों में छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, लोक निर्माण विभाग के तकनीकी मापदंड तथा सार्वजनिक वित्तीय नियम (Public Financial Rules) के तहत पारदर्शिता, गुणवत्ता नियंत्रण और सूचना प्रदर्शन को अनिवार्य माना गया है। यदि इन नियमों का पालन नहीं किया गया है, तो यह प्रशासनिक लापरवाही ही नहीं बल्कि कानूनी जिम्मेदारी का भी विषय बन सकता है।स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठने लगा है कि बिना सूचना बोर्ड के कार्य क्यों कराया जा रहा है और क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा निर्माण की नियमित निगरानी की जा रही है। यदि प्रारंभिक चरण में ही गुणवत्ता से समझौता किया गया है, तो भविष्य में यह ढांचा क्षतिग्रस्त होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के बीच यह मांग तेजी से उठ रही है कि पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका की जांच हो तथा यदि किसी प्रकार की वित्तीय अथवा तकनीकी अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधितों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही ही किसी भी शासकीय निर्माण की आधारशिला होती है। यदि इन मूल सिद्धांतों को दरकिनार किया गया है, तो यह केवल एक निर्माण कार्य की कमी नहीं बल्कि व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

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