दुर्ग के तेलीगुण्डरा की सखी महिलाओं ने मशरूम उत्पादन से रची आत्मनिर्भरता की मिसाल

संपादक :- मीनू साहू
सफलता की प्रेरक कहानी
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के छोटे से ग्राम तेलीगुण्डरा में महिलाओं ने अपनी मेहनत, लगन और साहस के बल पर ऐसी कहानी लिखी है, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन रही है। यहाँ की “सखी महिला स्व सहायता समूह” की महिलाओं ने बटन मशरूम उत्पादन के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया कि अवसर और सही मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक प्रगति की नई इबारत लिख सकती हैं।छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” से प्रेरित होकर इस समूह की 12 महिलाओं ने मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी। उत्पादन के लिए उपयुक्त स्थान की समस्या सामने आई, लेकिन ग्राम पंचायत के सहयोग से भवन उपलब्ध हुआ और यहीं से आत्मनिर्भरता की नई यात्रा आरंभ हुई। आधुनिक तकनीकों और व्यवस्थित प्रबंधन के साथ इन महिलाओं ने मशरूम उत्पादन को सफल व्यवसाय में बदल दिया।प्रारंभ में मात्र 45 बैग से शुरू हुआ यह प्रयास धीरे-धीरे सफलता की ऊँचाइयों को छूने लगा। आज यही पहल उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 80 हजार रुपये की शुद्ध आय प्रदान कर रही है। इस उपलब्धि ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि गांव में ही रोजगार का भरोसेमंद विकल्प भी तैयार किया है।समूह को मिली 15 हजार रुपये की चक्रीय निधि ने भी महिलाओं के आत्मविश्वास को और मजबूती दी। इस राशि का उपयोग वे घरेलू जरूरतों और छोटे-मोटे आर्थिक संकटों को संभालने में कर रही हैं। इससे समूह के भीतर सहयोग और आत्मनिर्भरता की भावना और प्रबल हुई है।इस सफलता की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि जो महिलाएं कभी स्वयं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही थीं, आज वही महिलाएं “मास्टर ट्रेनर” बनकर अन्य ग्राम पंचायतों के स्व सहायता समूहों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दे रही हैं। वे अपने अनुभव, तकनीक और प्रबंधन के गुर साझा कर कई अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही हैं।बिहान योजना के अधिकारियों के मार्गदर्शन, ग्राम पंचायत के सहयोग और अपनी अटूट मेहनत के बल पर तेलीगुण्डरा की ये महिलाएं आज आत्मविश्वास के साथ खड़ी हैं। उनकी यह उपलब्धि केवल आर्थिक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण नारी शक्ति के जागरण और बदलाव की जीवंत मिसाल बन चुकी



