जल संचित, भविष्य सुरक्षित ‘मोर गांव-मोर पानी’ ने बदली विकास और समृद्धि की तस्वीर
तकनीकी नवाचार, जनभागीदारी और जल संरक्षण के संग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई उड़ान

संपादक:- मीनू साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद की धरती पर जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने वाला ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान आज ग्रामीण विकास की नई इबारत लिख रहा है। यह केवल जल बचाने की योजना नहीं, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर, समृद्ध और पर्यावरणीय दृष्टि से सशक्त बनाने का व्यापक प्रयास है। आधुनिक तकनीक, सामुदायिक सहभागिता और दूरदर्शी सोच के समन्वय से यह अभियान प्रदेश के हजारों गांवों में आशा, विश्वास और बदलाव का प्रतीक बनकर उभरा है।
जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में इस पहल ने नई ऊर्जा का संचार किया है। खेतों तक पानी की उपलब्धता बढ़ी है, भूजल स्तर में सुधार आया है और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को नई दिशा मिली है। गांवों में निर्मित जल संरचनाएं केवल वर्षा जल को संचित नहीं कर रहीं, बल्कि कृषि उत्पादन, पशुपालन और ग्रामीण रोजगार के नए द्वार भी खोल रही हैं।
इस अभियान के अंतर्गत लगभग 1610 करोड़ रुपये की लागत से एक लाख से अधिक जल संरक्षण कार्यों का निर्माण किया गया है। इन कार्यों में तालाब गहरीकरण, जलाशय निर्माण, स्टॉप डैम, कंटूर ट्रेंच, सोख्ता गड्ढे और विभिन्न संरचनाएं शामिल हैं, जिन्होंने वर्षा की हर बूंद को सहेजने का प्रभावी माध्यम तैयार किया है। इसके परिणामस्वरूप अनेक क्षेत्रों में खेती का रकबा बढ़ा है और किसानों की आय में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली है।
इस महाअभियान का एक महत्वपूर्ण पक्ष ग्रामीण रोजगार सृजन भी है। प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। विशेष रूप से महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी इस अभियान की सफलता का आधार बनी है। 57 प्रतिशत महिला श्रमिकों की सहभागिता न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का उदाहरण है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की प्रेरक कहानी भी प्रस्तुत करती है।
हरियाली, जल सुरक्षा और रोजगार के त्रिवेणी संगम ने गांवों की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। जहां कभी सूखे की चिंता थी, वहां अब विकास की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। जल संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता ने लोगों में अपने प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी मजबूत किया है।‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान यह साबित करता है कि जब संकल्प, तकनीक और जनशक्ति एक साथ आगे बढ़ते हैं, तब परिवर्तन केवल दिखाई नहीं देता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, समृद्ध और खुशहाल भविष्य की मजबूत नींव भी तैयार करता है।



