पलारी शपथ ग्रहण विवाद नगर पंचायत अधिकारी की लापरवाही से बढ़ा सियासी संग्राम, खर्च की जवाबदेही पर उठे सवाल

संपादक:- मीनू साहू
बालोद/पलारी। बालोद जिला में नगर पंचायत पलारी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एवं पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह के बाद उत्पन्न राजनीतिक विवाद अब प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी खर्च के मुद्दे तक पहुंच गया है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि कार्यक्रम के संचालन में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण लोकतांत्रिक आयोजन राजनीतिक विवाद में बदल गया।
भाजपा का कहना है कि यदि कार्यक्रम की रूपरेखा निष्पक्ष और संतुलित ढंग से तैयार की जाती तथा सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों को समान महत्व दिया जाता, तो ऐसी स्थिति निर्मित नहीं होती। पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब शपथ ग्रहण जैसे संवैधानिक कार्यक्रम के आयोजन पर सरकारी संसाधन और जनता का पैसा खर्च किया गया, तब कार्यक्रम के दौरान उत्पन्न अव्यवस्था और विवाद की जिम्मेदारी कौन लेगा।
भाजपा पदाधिकारियों का आरोप है कि नगर पंचायत प्रशासन और आयोजन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली के कारण कार्यक्रम का उद्देश्य प्रभावित हुआ। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन से आयोजित समारोह का बहिष्कार होना और निर्वाचित पार्षदों द्वारा अलग से शपथ ग्रहण करना प्रशासनिक विफलता का संकेत है।नेताओं ने मांग की है कि समारोह की संपूर्ण प्रशासनिक जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि कार्यक्रम की योजना, मंच व्यवस्था, आमंत्रण प्रक्रिया और प्रोटोकॉल निर्धारण में किस स्तर पर चूक हुई। साथ ही यह भी जांच हो कि यदि सरकारी धन से आयोजित कार्यक्रम अपने मूल उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाया तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा नेताओं का कहना है कि नगर पंचायत जनता की संस्था है और उसके कार्यक्रम किसी एक राजनीतिक दल के प्रभाव में नहीं होने चाहिए। यदि अधिकारियों की लापरवाही या पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण विवाद उत्पन्न हुआ है तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।फिलहाल पलारी का शपथ ग्रहण समारोह लोकतांत्रिक गरिमा, प्रशासनिक निष्पक्षता और सरकारी खर्च की जवाबदेही को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है।
राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के साथ अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है और विवाद के लिए जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।



