चावल पापड़ उद्योग बना आत्मनिर्भरता की मिसाल,

संपादक:- मीनू साहू
दुर्ग:- छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला के ग्राम पंचायत ननकट्ठी की श्रीमती विद्यावती चौधरी ने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प, सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन के बल पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक सशक्तिकरण की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर उन्होंने न केवल अपनी आजीविका को मजबूत बनाया, बल्कि अनेक महिलाओं के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन की नींव रखी।
आराध्या स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष एवं एफएलसीआरपी के रूप में कार्यरत विद्यावती चौधरी ने समूह की बचत और ऋण राशि का सदुपयोग करते हुए चावल पापड़ निर्माण तथा सिलाई केंद्र की शुरुआत की। शुरुआती दौर में सीमित संसाधनों के बीच घर-आंगन में छोटे स्तर पर उत्पादन शुरू किया गया, लेकिन मेहनत, अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों ने जल्द ही इस पहल को नई पहचान दिला दी।
समूह की महिलाएं प्रतिदिन संगठित होकर चावल पापड़ तैयार करती हैं। बेहतर गुणवत्ता और ग्राहकों के विश्वास के कारण उत्पादों की मांग लगातार बढ़ी, जिससे यह छोटा प्रयास सफल उद्यम में परिवर्तित हो गया। वर्तमान में समूह द्वारा निर्मित पापड़ स्थानीय बाजारों में लोकप्रिय हैं और हर माह अच्छा कारोबार कर रहे हैं।इस पहल का सबसे बड़ा लाभ महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार के रूप में सामने आया है। नियमित आय से परिवारों की आवश्यकताओं की पूर्ति आसान हुई है। बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और घरेलू खर्चों में अब पहले की तुलना में अधिक स्थिरता आई है। साथ ही महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की योग्यता का भी उल्लेखनीय विकास हुआ है।
विद्यावती चौधरी की यात्रा केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने दिखाया है कि अवसर और प्रशिक्षण मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी रोजगार सृजन कर समाज में परिवर्तन की अग्रदूत बन सकती हैं। ननकट्ठी की यह कहानी आज अनेक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनकर ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है।



