सर्वर डाउन के सहारे शिक्षा व्यवस्था! आखिर आधुनिक छत्तीसगढ़ का सपना कैसे होगा साकार?
— आरटीआई कार्यकर्ता यशवंत निषाद

संपादक:- मीनू साहू
बालोद। छत्तीसगढ़ प्रदेश के बालोद जिले में सुशासन सरकार के कार्यकाल में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली गंभीर सवालों के घेरे में है। प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में 15 जून से छात्र-छात्राओं को निःशुल्क पुस्तक वितरण करने की घोषणा की गई थी। स्कूल खुले एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक अधिकांश विद्यार्थियों को पुस्तकें नहीं मिल पाई हैं। इसके पीछे विभाग द्वारा लगातार “सर्वर डाउन” होने का कारण बताया जा रहा है।
आरटीआई कार्यकर्ता यशवंत निषाद ने कहा कि जब नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ हो चुका है, तब बिना पुस्तकों के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होना स्वाभाविक है। कक्षाएं संचालित हो रही हैं, शिक्षक उपस्थित हैं, लेकिन अध्ययन सामग्री के अभाव में बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ दिखाई दे रहा है। इसका सबसे अधिक असर गरीब, किसान, मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि स्थिति ऐसी बनती जा रही है कि कई पालक अपने बच्चों की पढ़ाई बाधित होते देख निजी स्कूलों की ओर रुख करने को मजबूर हो सकते हैं। निजी स्कूलों में प्रवेश लेने के बाद उन्हें पूरे वर्ष भारी फीस, महंगी पुस्तकें, स्कूल ड्रेस तथा अन्य खर्चों का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा। ऐसे में यह प्रश्न उठना लाजिमी है कि सरकारी व्यवस्था की कमजोरियों का लाभ आखिर किसे मिल रहा है?
यशवंत निषाद ने कहा कि एक ओर प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ को आधुनिक, तकनीकी रूप से सक्षम और विकसित राज्य बनाने का सपना दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा जैसी मूलभूत व्यवस्था सर्वर डाउन की समस्या से जूझ रही है। यदि विद्यार्थियों को समय पर निःशुल्क पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई जा सकतीं, तो तकनीकी विकास के बड़े-बड़े दावों की वास्तविकता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं जनता का अधिकार हैं। जब इन आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता ही तकनीकी अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही के कारण प्रभावित होने लगे, तब विकास के दावे केवल कागजी नजर आने लगते हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता यशवंत निषाद ने मांग की है कि शिक्षा विभाग तत्काल व्यवस्था में सुधार कर सभी विद्यार्थियों को शीघ्र पुस्तकें उपलब्ध कराए तथा यह स्पष्ट करे कि आधुनिक और डिजिटल छत्तीसगढ़ की परिकल्पना के बीच बार-बार सर्वर डाउन जैसी समस्याएं क्यों सामने आ रही हैं। विद्यार्थियों का भविष्य किसी तकनीकी बहाने का मोहताज नहीं होना चाहिए।



