संपादक मीनू साहू
बालोद :- सरकारी सेवा का अंत केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होता, बल्कि उस समर्पण, संघर्ष और जिम्मेदारी को सम्मान देने का अवसर भी होता है, जिसने वर्षों तक समाज की नई पीढ़ी को दिशा दी। ऐसा ही भावुक और गरिमामय दृश्य तब देखने को मिला, जब पूर्व माध्यमिक शाला हडगहन में पदस्थ शिक्षक मानसिंह ठाकुर अपने लगभग नौ वर्षों के सेवाकाल के बाद सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2017 से 2026 तक उन्होंने विद्यालय में शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन, संस्कार और नैतिक मूल्यों की ऐसी नींव रखी
जिसकी छाप लंबे समय तक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में दिखाई देगी।विद्यालय परिसर में आयोजित विदाई समारोह भावनाओं से ओतप्रोत रहा। विद्यार्थियों की आंखें नम थीं तो सहकर्मियों के चेहरे पर गर्व और सम्मान साफ झलक रहा था। शाला प्रबंधन समिति, शिक्षकों, पालकों तथा ग्रामीणों ने श्री ठाकुर का फूलमाला, शॉल एवं श्रीफल भेंट कर आत्मीय अभिनंदन किया।
उपस्थित लोगों ने उनके सरल स्वभाव, कर्तव्यनिष्ठा और विद्यार्थियों के प्रति समर्पित सोच को याद करते हुए उज्ज्वल एवं स्वस्थ जीवन की कामना की समारोह को संबोधित करते हुए आरटीआई जिलाध्यक्ष ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक ताकत उसके शिक्षक होते हैं। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा नहीं करते, बल्कि समाज के भविष्य का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि मानसिंह ठाकुर ने पूरी ईमानदारी और निस्वार्थ भावना के साथ शिक्षा की अलख जगाई तथा अनेक विद्यार्थियों को बेहतर नागरिक बनने की प्रेरणा दी।
उनका योगदान केवल विद्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत बना।हालांकि सरकारी सेवा से उनकी औपचारिक जिम्मेदारी आज समाप्त हो गई, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्य, विद्यार्थियों के मन में बसाए गए संस्कार और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। किसी शिक्षक की वास्तविक पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके द्वारा तैयार किए गए विद्यार्थियों से होती है।
यही कारण है कि हडगहन विद्यालय के लिए यह दिन विदाई का जरूर था, लेकिन उससे कहीं अधिक एक ऐसे शिक्षक के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी, जिन्होंने चुपचाप अपने कर्म से अनेक जीवनों को नई दिशा दी।
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