हमर छत्तीसगढ़

डौंडीलोहारा की लोक कला को नई पहचान, ‘लोक सिरजन’ संस्था ए ग्रेड में अपग्रेड

संस्कृति विभाग के संचालक कन्नौजे से मुलाकात कर संस्था ने जताया आभार, पद्मश्री कलाकारों समेत प्रदेश के लोक कलाकार रहे मौजूद

संपादक:- मीनू साहू

डौंडीलोहारा। छत्तीसगढ़ की लोक कला, संस्कृति और पारंपरिक विरासत को मंच देने वाली लोक सिरजन सांस्कृतिक संस्था, डौंडीलोहारा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा संस्था को ए ग्रेड में अपग्रेड किए जाने की प्रक्रिया को लेकर संस्था के प्रतिनिधियों ने संस्कृति विभाग के संचालक कन्नौजे से मुलाकात कर आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को देश-प्रदेश में पहचान दिलाने वाले कई प्रतिष्ठित कलाकार भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पद्मश्री राधेश्याम बारले, पद्मश्री डी. भारती तथा पद्मश्री डोमारसिंह कुंवर की मौजूदगी ने इस मुलाकात को विशेष बना दिया। वरिष्ठ कलाकारों की उपस्थिति ने लोक कला के संरक्षण और कलाकारों को प्रोत्साहन देने की दिशा में इस उपलब्धि के महत्व को और बढ़ा दिया।

संस्था की ओर से संचालक डोमेन्द्र देशमुख और निर्देशक संतोष देशमुख ने संस्कृति विभाग के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोक सिरजन सांस्कृतिक संस्था लंबे समय से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, गीत-संगीत और सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करने की दिशा में कार्य कर रही है। ए ग्रेड में उन्नयन संस्था से जुड़े कलाकारों और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए उत्साहवर्धक कदम है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध गीतकार, संगीतकार, लोक गायक एवं छत्तीसगढ़ी फिल्म गीतकार विष्णु कोठारी (मीत) फिरतुटोला (नंगुटोला), जिला बालोद की उपस्थिति भी मौजूद रहे। कलाकारों और संस्था के पदाधिकारियों ने संस्कृति विभाग के इस निर्णय को लोक कलाकारों के लिए सकारात्मक अवसर के रूप में देखा।

लोक सिरजन सांस्कृतिक संस्था का ए ग्रेड में अपग्रेड होना केवल संस्था की उपलब्धि नहीं, बल्कि डौंडीलोहारा और बालोद अंचल की सांस्कृतिक पहचान के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को बेहतर मंच, सांस्कृतिक गतिविधियों को व्यापक अवसर और पारंपरिक कलाओं को आगे बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी लोक बोली, लोकगीत, लोकनृत्य और जनजीवन से जुड़ी परंपराओं में बसती है। ऐसे में संस्थागत स्तर पर मिलने वाला प्रोत्साहन इन विधाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। डौंडीलोहारा की लोक सिरजन सांस्कृतिक संस्था का यह उन्नयन इसी दिशा में एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है।

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