हमर छत्तीसगढ़

प्रवक्ता मोंटू चंद्राकर बोले—लोकतंत्र में सरकारी संस्थाएं किसी व्यक्ति विशेष के प्रचार का माध्यम नहीं हो सकतीं

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रकाश नाहटा ने पंचायतों को कार्यक्रम से जोड़ने पर उठाए सवाल

संपादक:- मीनू साहू 

ग्राम पंचायतों में ‘आशीर्वाद का दीया’ पर प्रकाश नाहटा का तीखा सवाल—जनता के काम छोड़ सरकारी तंत्र से राजनीतिक आयोजन क्यों 

बालोद। छत्तीसगढ़ में बालोद जिला के ग्राम पंचायतों में ‘आशीर्वाद का दीया अभियान’ को लेकर कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रकाश नाहटा का आरोप है कि पंचायतों और शासकीय कर्मचारियों को ऐसे आयोजन से जोड़ना स्थानीय स्वशासन की गरिमा और प्रशासनिक निष्पक्षता को प्रभावित करता है। उन्होंने मांग की है कि कार्यक्रम को लेकर जारी निर्देशों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि पंचायत प्रतिनिधियों तथा कर्मचारियों की भागीदारी अनिवार्य है अथवा स्वैच्छिक है । और कहा कि ग्राम पंचायतें संविधान के विकेंद्रीकृत शासन ढांचे का हिस्सा हैं। उनका मूल दायित्व गांव की स्थानीय जरूरतों और विकास योजनाओं से जुड़ा है। ऐसे में पंचायत भवनों और सरकारी अमले का उपयोग किसी राजनीतिक व्यक्तित्व से संबंधित शुभकामना कार्यक्रम में किए जाने पर प्रशासन को यह बताना चाहिए कि इसके पीछे शासकीय उद्देश्य क्या है।

सरकारी मशीनरी पर दबाव का आरोप

कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि सरपंच, सचिव और पंचायत स्तर के कर्मचारियों को दीप प्रज्ज्वलन, लोगों की उपस्थिति तथा कार्यक्रम की तस्वीरें उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया जा रहा है। यदि किसी कर्मचारी या निर्वाचित प्रतिनिधि पर सहभागिता के लिए दबाव बनाया गया है तो जिला कांग्रेस ने इसे गंभीर प्रशासनिक विषय बताते हुए जांच की मांग की है।कांग्रेस के अनुसार शासकीय कर्मचारी किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं होते। उनकी जिम्मेदारी शासन की योजनाओं को पात्र लोगों तक पहुंचाने और प्रशासनिक कार्यों को निष्पक्ष रूप से पूरा करने की होती है। इसलिए सरकारी पद का इस्तेमाल किसी राजनीतिक गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए नहीं होना चाहिए।

पंचायतों की प्राथमिकता पर सवाल

कांग्रेस ने गांवों की मौजूदा जरूरतों का उल्लेख करते हुए कहा कि पंचायतों के सामने पेयजल, सड़क, नाली, स्वच्छता, मनरेगा, आवास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े अनेक कार्य हैं। कांग्रेस का सवाल है कि इन जिम्मेदारियों के बीच यदि पंचायत प्रशासन को निर्धारित समय पर किसी विशेष आयोजन की तैयारी और रिपोर्टिंग में लगाया जाता है, तो इसका विकास कार्यों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

लोकतंत्र में सरकारी संस्था की सीमा

लोकतंत्र में सत्ता बदल सकती है, लेकिन सरकारी संस्थाओं की निष्पक्षता और सार्वजनिक जवाबदेही बनी रहनी चाहिए। पंचायत किसी दल की संगठनात्मक इकाई नहीं बल्कि स्थानीय शासन की निर्वाचित संस्था है। इसलिए उसके संसाधनों, भवनों और कर्मचारियों का इस्तेमाल करते समय प्रशासनिक और संवैधानिक मर्यादाओं का ध्यान रखना जरूरी है।जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मोंटू चंद्राकर ने कहा, “लोकतंत्र में जनता के पैसे और सरकारी व्यवस्था से जनता के काम होने चाहिए, किसी व्यक्ति विशेष के लिए राजनीतिक माहौल बनाने का काम नहीं। अगर गांव में पानी, सड़क और रोजगार के सवाल अपनी जगह खड़े हैं और सरकारी तंत्र को दीया जलाने की जिम्मेदारी दी जा रही है, तो सरकार को यह भी बताना चाहिए कि यह पंचायत का कौन-सा संवैधानिक दायित्व है।”उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस किसी व्यक्ति के जन्मदिन या शुभकामना कार्यक्रम पर आपत्ति जताने के बजाय इस बात पर सवाल उठा रही है कि सरकारी संस्थाओं को राजनीतिक गतिविधि से जोड़ने का अधिकार और आधार क्या है।जिला कांग्रेस ने मांग की है कि संबंधित आदेश अथवा निर्देश सार्वजनिक किए जाएं, पंचायतों पर किसी प्रकार के दबाव की शिकायतों की जांच हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि स्थानीय निकाय अपने निर्धारित विकास कार्यों पर स्वतंत्र रूप से काम कर सकें।अब इस पूरे विवाद का केंद्र यही है कि सरकारी तंत्र और राजनीतिक आयोजन के बीच प्रशासनिक सीमा कहां निर्धारित की जाती है। सरकार की ओर से आदेश की प्रकृति, सहभागिता की अनिवार्यता और खर्च की व्यवस्था स्पष्ट होने के बाद ही इस विवाद से जुड़े कई सवालों की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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