हमर छत्तीसगढ़

108वीं जयंती पर गुंडरदेही नगर में संगोष्ठी व रक्तदान शिविर,दीनदयाल उपाध्याय को किया याद

बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में गुंडरदेही जनपद पंचायत प्रांगण के सामने स्थापित पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा स्थल पर आज उनकी 108वीं जयंती पर भव्य समारोह आयोजित हुआ। इस अवसर पर भाजपा कार्यकर्ताओं व जनप्रतिनिधियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर महान विचारक को स्मरण किया। उपस्थित लोगों ने उनके जीवन दर्शन और राष्ट्रहित में दिए गए योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनका आदर्श आज भी सामाजिक उत्थान के लिए मार्गदर्शक है।

माल्यार्पण के पश्चात भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें वक्ताओं ने ‘एकात्म मानववाद’ और ‘अंत्योदय’ जैसे दीनदयाल जी के मूल सिद्धांतों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि उपाध्याय जी का दर्शन समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाने का संदेश देता है। यह विचारधारा आज भी राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में प्रासंगिक है।

जयंती अवसर पर भाजपा मंडल गुंडरदेही ने सेवा पखवाड़ा के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रक्तदान शिविर का आयोजन किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं व युवाओं ने उत्साहपूर्वक रक्तदान कर मानवता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। कार्यक्रम में नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन समाज सेवा का प्रतीक है। उनके विचार हमें प्रेरित करते हैं कि हमें हर जरूरतमंद तक सहारा पहुँचाना चाहिए। उन्होंने रक्तदान को जीवनदान की संज्ञा देते हुए कहा कि यह आयोजन संगठन की सेवा भावना का प्रत्यक्ष उदाहरण है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन की सक्रिय भूमिका रही। साथ ही भाजपा नेता अश्विनी यादव, मंडल अध्यक्ष युवराज मारकंडे, मंडल उपाध्यक्ष हरीश निषाद, महामंत्री शैल महोबिया, विनोद चंद्राकर, सौरभ चोपड़ा, कोमल सोनकर, पार्षद संतोष नेताम, शंकर यादव, रोमलाल यादव, छगन सोनकर, चेतन सोनकर, अशोक महोबिया, मनोज बिंझेकर, भूषण साहू, दयानंद सिंह, रवि देवांगन, पोलक साहू, भारत साहू, कादिर मंसूरी, पंकज चौधरी, अनूप देशमुख, गगन जैन, देवा सोनकर सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने मिलकर संकल्प लिया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के बताए पथ पर चलते हुए समाज के अंतिम जन तक सेवा और विकास का संदेश पहुँचाया जाएगा।

इस प्रकार जयंती का यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि तक सीमित न रहकर, सेवा, समर्पण और सामाजिक जागरूकता का जीवंत उदाहरण बन गया

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