हिंद सेना के प्रदेश संयोजक तरुण नाथ योगी के प्रतीकात्मक मुंडन आंदोलन – प्रशासन को जनता की चेतावनी है संघर्षशील नेता राकेश जोशी
हिंद सेना के प्रदेश संयोजक तरुण नाथ योगी के प्रतीकात्मक मुंडन आंदोलन – प्रशासन को जनता की चेतावनी है संघर्षशील नेता राकेश जोशी

हिंद सेना के प्रदेश संयोजक तरुण नाथ योगी के प्रतीकात्मक मुंडन आंदोलन – प्रशासन को जनता की चेतावनी है संघर्षशील नेता राकेश जोशी

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद ज़िले में बेरोजगारी, संविदा भर्ती और पारदर्शिता को लेकर चल रहे आक्रोश का स्वरूप उस समय और तेज़ हो गया जब हिंद सेना ने प्रतीकात्मक मुंडन आंदोलन का ऐलान किया। आंदोलन का स्वरूप शांतिपूर्ण लेकिन संदेश अत्यंत स्पष्ट था – “युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ अब और बर्दाश्त नहीं।”लेकिन जैसे ही आंदोलन ने ज़मीन पर पकड़ बनाई, प्रशासनिक तंत्र हरकत में आया। एसडीएम नूतन कुमार ने हस्तक्षेप करते हुए सभी पक्षों को सुना और निष्पक्ष कार्यवाही का आश्वासन दिया। यही प्रशासन की न्यूनतम ज़िम्मेदारी थी, लेकिन आंदोलनकारियों ने इसे सकारात्मक संकेत मानते हुए आंदोलन को समाप्त किया। उन्होंने एसडीएम नूतन कुमार की संवेदनशीलता और सकारात्मक भूमिका के लिए आभार भी प्रकट किया।यह आंदोलन केवल हिंद सेना का नहीं था, बल्कि इसमें अनेक संगठन और जागरूक नागरिक भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। ओबीसी महासभा (जिला अध्यक्ष: यज्ञदेव पटेल), आम आदमी पार्टी (जिला अध्यक्ष: बालक सिंह साहू), हिंद सेना (प्रांतीय संयोजक: तरुण नाथ योगी), माँ कामधेनु सेवा दल (जिला अध्यक्ष: दिग्विजय सिंह क्षत्रिय), भावी संघर्षवीर (राकेश जोशी) जैसे संगठनों ने इस संघर्ष में अपनी भूमिका निभाकर यह संदेश दिया कि शिक्षित बेरोजगारों की लड़ाई केवल कुछ युवाओं की नहीं बल्कि पूरे समाज की सामूहिक आवाज़ है।

यह आंदोलन प्रशासन को सीधी चेतावनी देता है। यदि बेरोजगारों की मांगों और संविदा भर्ती में पारदर्शिता की माँग को नज़रअंदाज़ किया गया, तो यह केवल मुंडन तक सीमित नहीं रहेगा। युवाओं की नाराज़गी अगर भड़क उठी तो प्रशासन को कहीं अधिक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा।आज का यह प्रतीकात्मक आंदोलन एक संकेत है – युवाओं का धैर्य टूट चुका है और वे अब किसी भी तरह की लापरवाही या पक्षपातपूर्ण भर्ती नीति को सहन करने के मूड में नहीं हैं।हिंद सेना और सहयोगी संगठनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक निष्पक्ष कार्यवाही और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था लागू नहीं होगी, तब तक संघर्ष की आवाज़ गूंजती रहेगी।यह प्रशासन के लिए केवल एक “कड़वा घूंट” ही नहीं, बल्कि यह चेतावनी भी है कि समय रहते सुधार करें, वरना आने वाले दिनों में आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है




